नखरों से स्टारडम तक: कैसे बनीं मौसमी चटर्जी ‘बालिका बधू’ से बॉलीवुड की चमकती पहचान

मौसमी चटर्जी के दादा ब्रिटिशकाल में जज और इनके पिता भी सेना में नौकरी किया करते थे

मौसमी जी के पिता ने फिल्मों मे  काम करने कर दिया था मना डायरेक्टर तरुण मजूमदार ने छूट देने के लिए मना लिया

1967 में आई बांग्ला भाषी फिल्म बालिका बधू है और मौसमी चटर्जी के हीरो थे पार्थ मुखर्जी

मौसमी चटर्जी ने शूटिंग के वक्त इतने नखरे किए कि एक वक्त वो आया जब तरुण मजूमदार चिढ़कर बोले,"मैं इस फिल्म को बनाउंगा ही नहीं। अब तक जो भी शूटिंग मैंने की है मैं उसकी रील्स को जला दूंगा।"

मौसमी बहुत छोटी थी जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म में काम किया था। वो महज़ पांचवी क्लास में थी।  इसलिए उनको बड़ी दिखाने के लिए उनका काफी मेकअप किया जाता था।

मौसमी जी का असल नाम इंदिरा है। लेकिन जब वो पहली फिल्म में काम कर रही थी तब उनकी बड़ी बहन ने उन्हें मौसमी नाम दिया था।

बालिका बधू की शूटिंग के दौरान ही मौसमी चटर्जी की पहली मुलाकात हुई थी हेमंत कुमार से। हेमंत कुमार जी बालिका बधू के संगीतकार थे।

हेमंत कुमार भविष्य में उनके ससुर होंगे। जी हां, मौसमी चटर्जी की शादी हेमंत कुमार जी के बेटे जयंत मुखर्जी से हुई है। बालिका बधू बहुत बढ़िया चली थी।

हेमंत कुमार जी ने शादी के बाद मौसमी जी से पूछा था कि क्या तुम अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हो।  लेकिन मौसमी जी ने मना कर दिया। क्योंकि पढ़ाई में इनका कुछ खास मन नहीं लगता था।

शादीशुदा एक्ट्रेस हीरोइन के किरदारों में सफल नहीं हो पाती हैं। लेकिन शक्ति सामंत का ऐसा सोचना एकदम गलत साबति हुआ। हिंदी फिल्मों में मौसमी चटर्जी के पहले हीरो रहे विनोद मेहरा।