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हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने में मददगार है..अर्जुन की छाल

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हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने में मददगार है..अर्जुन की छाल

वेब डेस्क खबर 24×7 // अर्जुन वृक्ष के बारे मे आपने सुना ही होगा ये हृदय हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने में मददगार है। यह मुख्य रूप से उच्च रक्तचाप (BP), कोलेस्ट्रॉल, हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी, और हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने में मददगार है।

यह कसैला, शीतल और सूजनरोधी गुणों से भरपूर होता है, जो वजन घटाने, पेट के रोगों, सांस की समस्याओं और डायबिटीज को नियंत्रित करने में भी काम आता है।

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औषधीय उपयोग और फायदे:

  • हृदय स्वास्थ्य:अर्जुन की छाल का नियमित सेवन हृदय को शक्ति देता है, मांसपेशियों को मजबूत करता है और रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल: यह स्वाभाविक रूप से रक्तचाप को कम करने और खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करती है।
  • पाचन और सूजन:इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो पेट की सूजन, गैस और कब्ज से राहत दिलाते हैं।
  • चर्म रोग और त्वचा:यह त्वचा रोगों और मुँहासों के उपचार में सहायक है।

हड्डी और कमजोरी: यह हड्डियों के टूटने पर रिकवरी में मदद करती है और शारीरिक कमजोरी दूर करती है।

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सेवन के तरीके:

  1. अर्जुन छाल का काढ़ा:1 चम्मच छाल के चूर्ण या छाल को 2 कप पानी में तब तक उबालें जब तक वह आधा न रह जाए।
  2. अर्जुन दूध (क्षीर पाक): अर्जुन की छाल के पाउडर को दूध के साथ उबालकर पीना हृदय के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है।

सावधानी: इसका सेवन संतुलित मात्रा में और किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में सेवन से ब्लड प्रेशर बहुत कम हो सकता है।




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error: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !!
खैरागढ़ में चैत्र नवरात्र की तैयारी पूरी, कल होगी ज्योति कलश स्थापना खैरागढ़। नगर सहित पूरे क्षेत्र के देवी मंदिरों में चैत्र नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार से प्रारंभ हो रहे वासंती नवरात्रि के अवसर पर शहर के प्रमुख मां दंतेश्वरी माता मंदिर, मां शीतला मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में ज्योति कलश की स्थापना की जाएगी। मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी डॉ. मंगलानंद झा ने बताया कि यह मंदिर खैरागढ़ का सबसे प्राचीन देवी मंदिर है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है और इस बार विक्रम संवत 2083 का नाम ‘रुद्र’ संवत्सर रहेगा। उन्होंने नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, लेकिन आश्विन और चैत्र नवरात्रि विशेष रूप से प्रमुख मानी जाती हैं। चैत्र नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है। मुहूर्त को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योति प्रज्वलन का कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता, बल्कि कलश स्थापना, नवग्रह, गौरी-गणेश, सप्तमातृका, षोडश मातृका और योगिनी की स्थापना के लिए निश्चित समय होता है। मां दंतेश्वरी मंदिर में दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना की जाएगी। इसके बाद शाम के समय श्रद्धालु अपने नाम से स्थापित ज्योति कलश प्रज्वलित करेंगे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार मां दंतेश्वरी मंदिर में इस वर्ष करीब 330 ज्योति कलश स्थापित किए जाएंगे, जबकि इतवारी बाजार स्थित मां शीतला मंदिर में लगभग 250 ज्योति कलश स्थापित होंगे। खास बात यह है कि मां दंतेश्वरी मंदिर में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार ज्योति प्रज्वलित करवाते हैं। अबू धाबी, जर्मनी और कनाडा जैसे देशों में रह रहे श्रद्धालु भी मंदिर से जुड़े रहते हैं और नवरात्रि में अपनी सहभागिता निभाते हैं। चैत्र नवरात्रि को लेकर पूरे खैरागढ़ में भक्ति और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
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