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Wed. Apr 22nd, 2026

सोशल मिडिया बना युवाओं की ख़ुशी का दुश्मन

सोशल मिडिया बना युवाओं की ख़ुशी का दुश्मन
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सोशल मिडिया बना युवाओं की ख़ुशी का दुश्मन

खबर काम की खबर डेस्क खबर 24×7 नई दिल्ली // स्मार्टफोन की चमकती स्क्रीन पर सोशल मीडिया का ‘स्क्रॉल’ और लगातार नोटिफिकेशन…. यह सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की खुशी को धीरे-धीरे खा रहा ‘साइलेंट खतरा‘ बन चुका है। गैलप के एक लाख लोगों के सर्वे पर आधारित यूएन-समर्थित ‘वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026’ ने दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची जारी करते हुए युवाओं के गिरते मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया के बीच गहरे रिश्ते को उजागर किया है। अमरीका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे समृद्ध देशों में भी युवाओं की जीवन संतुष्टि तेजी से घटी है। वजह, डिजिटल तनाव और ‘वर्चुअल दुनिया’ में बढ़ता अकेलापन। Social media

डिजिटल तनाव बना ‘स्लो पॉइजन’

लगातार दूसरे साल अमरीका (23वां), ब्रिटेन (29वां) और कनाडा (25वां) टॉप-10 से बाहर रहे। विशेषज्ञ इसे ‘डिजिटल अलगाव’ का नतीजा मानते हैं, जहां कनेक्टिविटी बढ़ी, लेकिन असली रिश्ते कमजोर पड़ गए। जो युवा रोज 5 घंटे या उससे ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं, वे कम खुश पाए गए। दिन में 1 घंटे से कम इस्तेमाल करने वालों की ‘वेल-बीइंग’ बेहतर रही। Social mediaसोशल मिडिया बना युवाओं की ख़ुशी का दुश्मन

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भारत में सुधार, लेकिन सफर लंबा…

147 देशों की सूची में भारत 116वें स्थान पर है, जो पिछले साल के 118वें स्थान से मामूली सुधार है। हालांकि, यह सकारात्मक संकेत है लेकिन प्रति व्यक्ति आय, सामाजिक सहयोग और जीवन प्रत्याशा जैसे अहम पैमानों पर भारत को अभी लंबा रास्ता तय करना है।

फिनलैंड में भरपूर सहयोग और समानता

डिजिटल तनाव से दूर खुशहाली की दौड़ में फिनलैंड ने लगातार नौवीं बार पहला स्थान हासिल कर ‘खुशी की राजधानी’ होने का तमगा बरकरार रखा है। मजबूत सामाजिक सहयोग, पारदर्शी शासन व आर्थिक समानता इस देश की खुशियों के मूल में है। वहीं, युद्ध और संघर्ष झेल रहा अफगानिस्तान लगातार दुनिया का सबसे नाखुश देश बना हुआ है।

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Social media has become the enemy of youth’s happiness. source




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