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Wed. May 13th, 2026

बिजली गुल होने से हुई अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में 4 नवजातों की मौत..

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छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 अंबिकापुर/रायपुर// मेडिकल कॉलेज अस्पताल(Medical College hospital)अंबिकापुर में रविवार की रात 4 नवजात बच्चों की मौत हो गई। सभी अस्पताल के शिशुरोग विभाग के वार्ड में वेंटिलेटर पर थे। बताया जाता है कि अस्पताल में रात 11 बजे से 4 बजे तक बिजली गुल थी। इसी समय ही बच्चों की मौत हुई। परिजनों का आरोप है कि लाइट गुल होने से उनके बच्चों की मौत हुई है, जबकि मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. रमनेश मूर्ति का कहना है कि जिन बच्चों की मौत हुई, वे सभी गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। इसलिए बिजली गुल से मौत होने की बात कहना गलत है। Ambikapur,

बच्चों की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। परिजनों ने बच्चों की मौत पर जमकर हंगामा किया। वहीं, मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में बच्चों की मौत की खबर सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव और स्वास्थ्य सचिव आर. प्रसन्ना तत्काल अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे।  Ambikapur,

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इधर, घटना की जांच के लिए डीएमई ने दो डाक्टरों और दो इंजीनियरों की टीम गठित की है। टीम को 48 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा गया है। भाजपा प्रवक्ता अनुराग सिंह देव के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्तओं ने मंत्री को काले झंडे दिखाकर बच्चों की मौत पर इस्तीफे की मांग की।

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घंटों इंतजार करना पड़ा शव वाहन के लिए

परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते ही उनके नवजात बच्चों की मौत हुई है। बच्चों की मौत के बाद शव लेने को घर ले जाने के शव वाहन भी समय पर नहीं मिला, घंटों इंतजार करना पड़ा। Ambikapur

स्वास्थ्य मंत्री ने 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट

स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंह देव ने घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य सचिव आर. प्रसन्ना के साथ अंबिकापुर पहुंचे। उनके साथ मेडिकल कॉलेज रायपुर के शिशुरोग विभाग के एचओडी ओंकार खंडवाल सहित एक डॉक्टर भी गए। जहां स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल और अस्पताल के डॉक्टरों की एक घंटे तक बैठक ली। इस दौरान उन्होंने 48 घंटे में घटना की जांच रिपोर्ट देने कहा और दोषी पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करने की बात कही।

राज्यपाल और सीएम ने शोक व्यक्त किया

राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटना शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल उइके ने शिशुओं की मृत्यु की उचित जांच एवं कार्यवाही कर परिवारों को राहत दिलाने एवं भविष्य में इस प्रकार की घटना को रोकने के संबंध में शासन एवं प्रशासन को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने उन्होंने बच्चों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

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बिजली जाते ही अस्पताल में अफरा-तफरी

परिजनों के अनुसार अस्पताल में रात 11 से 3 बजे तक बिजली गुल हो गई थी। बिजली गुल होने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मची गई। शिशुरोग वार्ड के एसएनसीयू में भर्ती बच्चों को वहां नर्सों द्वारा बच्चों को उनके परिजनों को दे दिया गया, क्योंकि एसएनसीयू यूनिट के वार्मर ने काम करना बंद कर दिया था। स्टाफ नर्स ने सभी परिजनों से कहा कि वे अपने बच्चों को सीने से लगाकर तथा कंबल से ढंक कर रखें। रात तीन बजे के बाद जब बिजली आई तो फिर से बच्चों को एसएनसीयू में वार्मर रखा गया। इसके बाद एक-एक कर 4 नवजातों की मौत हो गई।.

    मौत के कारणों की जांच की जा रही है: सिंहदेव      

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा की अस्पताल में बिजली जाने की बात सामने आई है। लेकिन ये कोई कारण नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि अस्पताल में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सप्लाई जारी थी। डॉक्टरों का कहना है कि जिन चार बच्चों की मौत हुई वे गंभीर थे। वेंटिलेटर पर रखे गए थे। फिर भी बच्चों की मौत का कारण जाने के लिए कमेटी बनाई है। 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।

     हादसे की न्यायिक जांच हो: चंदेल      

इस हादसे पर नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस हादसे की न्यायिक जांच करने की मांग की है। साथ ही कहा, कांग्रेस सरकार में प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल है। इस सरकार में अब तक करीब 25 हजार बच्चों की मौत हो चुकी है।

घटनाक्रम एक नजर में..

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रात 11 से 3 बजे तक गुल रही बिजली।

रात 3 बजे के बाद एसएनसीयू में भर्ती 4 नवजात बच्चों की हुई मौत।

सुबह 5 से 8 बजे के बीच परिजनों को दी गई जानकारी

सुबह 10 बजे कलक्टर-एसपी ने सीएमएचओ सहित अन्य अफसरों के साथ बंद कमरे में की बैठक।

स्वास्थ्य सचिव के नेतृत्व में 4 सदस्यीय जांच टीम का हुआ गठन।

दोपहर में भाजपाइयों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य मंत्री से की इस्तीफे की मांग।

रायपुर से अंबिकापुर पहुंचते ही भाजपाइयों ने स्वास्थ्य मंत्री को दिखाए काले झंडे।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों व नर्सों से की चर्चा।


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