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इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में “बकरी” नाटक का हुआ नाट्य मंचन

इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में "बकरी" नाटक का हुआ नाट्य मंचन
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इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में “बकरी” नाटक का हुआ नाट्य मंचन

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़//  इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में नाट्य विभाग के विद्यार्थियों द्वारा नाटक की शानदार प्रस्तुति दी गई। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित नाटक ‘बकरी’ आजादी के बाद भारतीय राजनीति में नैतिक मूल्यों के ह्रास और अंधविश्वास पर एक तीखा व्यंग्य है।

नाटक में भ्रष्ट नेता एक गरीब बुजुर्ग की बकरी को गाँधी की बकरी बताकर पूजते हैं जिससे वे जनता का शोषण करते हैं और अपने कुकर्म को छिपाते हैं। यह नाटक छलावा और राजनीतिक हथकंडों को उजागर करता है। नाटक का निर्देशन अतिथि व्याख्याता डॉ. शिशु कुमार सिंह के द्वारा किया गया। कुलपति प्रो.डॉ. लवली शर्मा ने विद्यार्थियों की इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे और बेहतर बनाने की बात कही।

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इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में "बकरी" नाटक का हुआ नाट्य मंचन
“बकरी” नाटक का मंचन

उन्होंने बच्चों से अपने काम में पूर्णता लाने हेतु प्रेरित किया। अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजन यादव ने विद्यार्थियों से केवल यहीं तक सीमित न रहकर आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि आपका कार्य दूसरों की अपेक्षा बेहतर दिखना चाहिए। प्रो. यादव ने कुलपति से नाट्य मंचन हेतु आवश्यक संसाधन प्रदान करने हेतु निवेदन किया जिसे कुलपति ने सहज स्वीकार करते हुए आवश्यक सामग्रियों की जानकारी देने की बात कही।इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में "बकरी" नाटक का हुआ नाट्य मंचन

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नाट्य मंचन को सफल बनाने में छात्र कलाकार हर्ष अग्रवाल, ओमेंद्र पूरी गोस्वामी, हर्षल मेश्राम, दीपक साहू, अरविंद बसु, रुपेश तेंदुलकर, आशुतोष द्विवेदी, हर्षित डहरिया, काव्या त्रिमाले, वीरेंद्र साहू एवं किशन साहू ने बेहतर प्रस्तुति दी।




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खैरागढ़ में चैत्र नवरात्र की तैयारी पूरी, कल होगी ज्योति कलश स्थापना खैरागढ़। नगर सहित पूरे क्षेत्र के देवी मंदिरों में चैत्र नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार से प्रारंभ हो रहे वासंती नवरात्रि के अवसर पर शहर के प्रमुख मां दंतेश्वरी माता मंदिर, मां शीतला मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में ज्योति कलश की स्थापना की जाएगी। मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी डॉ. मंगलानंद झा ने बताया कि यह मंदिर खैरागढ़ का सबसे प्राचीन देवी मंदिर है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है और इस बार विक्रम संवत 2083 का नाम ‘रुद्र’ संवत्सर रहेगा। उन्होंने नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, लेकिन आश्विन और चैत्र नवरात्रि विशेष रूप से प्रमुख मानी जाती हैं। चैत्र नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है। मुहूर्त को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योति प्रज्वलन का कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता, बल्कि कलश स्थापना, नवग्रह, गौरी-गणेश, सप्तमातृका, षोडश मातृका और योगिनी की स्थापना के लिए निश्चित समय होता है। मां दंतेश्वरी मंदिर में दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना की जाएगी। इसके बाद शाम के समय श्रद्धालु अपने नाम से स्थापित ज्योति कलश प्रज्वलित करेंगे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार मां दंतेश्वरी मंदिर में इस वर्ष करीब 330 ज्योति कलश स्थापित किए जाएंगे, जबकि इतवारी बाजार स्थित मां शीतला मंदिर में लगभग 250 ज्योति कलश स्थापित होंगे। खास बात यह है कि मां दंतेश्वरी मंदिर में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार ज्योति प्रज्वलित करवाते हैं। अबू धाबी, जर्मनी और कनाडा जैसे देशों में रह रहे श्रद्धालु भी मंदिर से जुड़े रहते हैं और नवरात्रि में अपनी सहभागिता निभाते हैं। चैत्र नवरात्रि को लेकर पूरे खैरागढ़ में भक्ति और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।