आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं का दो दिवसीय कामबंद आंदोलन, खैरागढ़ में धरना प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच छत्तीसगढ़ के प्रांतीय आह्वान पर केसीजी जिले में 26 और 27 फरवरी को दो दिवसीय कामबंद आंदोलन किया गया। जिला मुख्यालय खैरागढ़ के इतवारी बाजार स्थित रावण भाटा में धरना, रैली और प्रदर्शन कर केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। आंदोलन के चलते जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लटका रहा, जिससे सेवाएं प्रभावित रहीं।
आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी तथा छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
बढ़ती महंगाई में अपर्याप्त वेतन
संयुक्त मंच की जिला अध्यक्ष लता तिवारी, खैरागढ़ ब्लॉक अध्यक्ष रामकली यादव, छुईखदान ब्लॉक अध्यक्ष जयश्री गंधर्व, जिला उपाध्यक्ष बदरूँ निशा सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के 50 वर्ष पूर्ण होने और देश में ‘अमृत काल’ मनाए जाने के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। वर्ष 2 हजार 18 के बाद से मानदेय में वृद्धि नहीं होने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। वर्तमान में कार्यकर्ताओं को 4 हजार 5 सौ रुपये तथा सहायिकाओं को 22 सौ 50 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई के बीच अपर्याप्त बताया गया।
संयुक्त मंच ने आरोप लगाया कि वर्ष 2 हजार 26, 27 के केंद्रीय एवं राज्य बजट में शासकीयकरण, न्यूनतम वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे मुद्दों पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। मंच के अनुसार देशभर की लगभग 28 लाख और छत्तीसगढ़ की करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाएं इससे प्रभावित हैं।![]()
ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शिक्षाकर्मी और पंचायत कर्मियों की तर्ज पर शासकीय कर्मचारी घोषित करने, शासकीयकरण तक कार्यकर्ताओं को 26 हजार रुपये और सहायिकाओं को 22 हजार 100 रुपये प्रतिमाह वेतन देने, मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष 1000 रुपये वेतन वृद्धि लागू करने, सेवानिवृत्ति पर मासिक पेंशन एवं एकमुश्त ग्रेच्युटी की व्यवस्था, समूह बीमा, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, आकस्मिक मृत्यु पर अनुकंपा नियुक्ति तथा पर्याप्त सवैतनिक अवकाश की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
मंच का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में अवकाश लेने पर मानदेय कटौती की जाती है, जिससे कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आर्थिक व सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
संयुक्त मंच ने चेतावनी दी है कि यदि 8 मार्च तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 9 मार्च को प्रदेशभर की एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाएं राजधानी रायपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगी और आंदोलन को व्यापक रूप देंगी।
पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकारें महिला सशक्तिकरण की बात करती हैं तो जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी ह।



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