कहीं आपके घर में भी तो नहीं हो रही यह बड़ी चूक? बैंकों में लावारिस पड़े हैं 80,000 करोड़!
राष्ट्रीय खबर डेस्क खबर 24×7 नई दिल्ली // यह घर-घर की कहानी है। परिवारों में कोई एक व्यक्ति (ज्यादातर पति) आर्थिक व्यवस्थाएं संभालता है। दूसरा साथी (ज्यादातर पत्नी) इस तरफ से निश्चित रहता है। पति या पत्नी का धन-संपत्ति के बारे में पूछताछ को शक की निगाह से देखने व विश्वास की कमी का संकेत मान लिया गया है।
एक अच्छी शादी के लिए इस ‘अनकहे भरोसे’ को जरूरी समझना अक्सर परिवार को उस विरासत में वंचित कर देता है, जिसका वह हकदार है। जीवन बीमा की फाइलें हों या एफडी रिन्यू करने की जिम्मेदारी या अन्य निवेश, अक्सर किसी एक के जिम्मे होता है। उस व्यक्ति की असमय मौत होने पर सारी सूचनाएं खामोश हो जाती है। Unclaimed Money in Banks
अभियान से भी नहीं खोज पाए दावेदारसरकार ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान चलाकर दावेदारों को खोजना चाहा लेकिन 23 लाख दावेदारों के सिर्फ 5,777 करोड़ रुपए ही लौटाए जा सके। |
आज ही बदलें अपनी आदत
पति-पत्नी संपत्ति पर संवाद करें। लिखित दस्तावेज में बैंक खाते, पॉलिसियां, पीएफ नंबर और डीमैट खाते का पूरा विवरण दर्ज हो।
यह स्वीकार करें कि वित्तीय अधिकार दोनों का बराबर है। जो वित्तीय जानकारी को गुप्त रखेगा, वह परिवार को आर्थिक रूप से उलझाएगा।
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बैंकों में पड़े हैं 80 हजार करोड़ रुपए लावारिस
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रिजर्व बैंक में 60,518 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं। इस पर पिछले 10 साल में किसी ने दावा नहीं किया।
लावारिस बीमा और म्यूचुअल 2 फंड: बीमा कंपनियों के 8,973 करोड़ रुपए, म्यूचुअल फंड में 3,749 करोड़ व शेयर व लाभांश में 5,600 करोड़ रुपए बिना दावे के पड़े हैं।
3.10.181 करोड़ लावारिस पीएफ खातों पड़े हैं। |
पॉलिसी खरीदने से ज्यादा बताना जरूरी
वित्तीय साक्षरता का मतलब यह समझा जाता है कि कौन-सा अच्छा शेयर खरीदें या कहां ज्यादा रिटर्न मिलेगा। असली समस्या निवेश नहीं, बल्कि निवेश को ‘उजागर’ (डिस्क्लोज) करने की है। Unclaimed Money in Banks
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