Breaking
Thu. Mar 26th, 2026

गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 

गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 
खबर शेयर करें..

गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 गंडई पंडरिया //  स्थानीय शासकीय महाविद्यालय गंडई में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

 

solar pinal
solar pinal

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों एवं वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए अपने गहन विचारो को साझा किये।

सोशल मिडिया से जुड़ने क्लिक करें..
Ad by study point kgh

इस संगोष्ठी में 140 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता कर शोधपत्र प्रस्तुत किए एवं अकादमिक विमर्श में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिये।

 

समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री अजय मंडावी उपस्थित रहे, जिन्होंने जनजाति शिल्प परम्परा को वर्तमान रोजगार से जोड़कर विकास के पथ पर बढ़ने की बात कही।गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 

संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. सुरेश पटेल ने अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में डॉ. महेश श्रीवास्तव, डॉ. भुवाल सिंह, डॉ. सियाराम शर्मा, डॉ. अवधेश श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

यह आयोजन महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. डी. पी. कुर्रे के कुशल नेतृत्व तथा प्राचार्य डॉ. एन. एस. वर्मा के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। संगोष्ठी में महाविद्यालय के अधिकारी कर्मचारी और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयास से सफल हुआ।

संगोष्ठी को सफल बनाने में नगर पंचायत अध्यक्ष लाल टाकेश्वर शाह खुशरो का भी विशेष योगदान रहा । महाविद्यालय में आयोजित यह पहला बड़ा राष्ट्रीय सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न होकर संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि एवं मील का पत्थर सिद्ध हुआ।


Rohit dewangan-gandai
रिपोर्ट : रोहित देवांगन, गंडई
विज्ञापन के लिए सम्पर्क करें.. 7415791636



खबर शेयर करें..

Related Post

Leave a Reply

error: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !!
खैरागढ़ में चैत्र नवरात्र की तैयारी पूरी, कल होगी ज्योति कलश स्थापना खैरागढ़। नगर सहित पूरे क्षेत्र के देवी मंदिरों में चैत्र नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार से प्रारंभ हो रहे वासंती नवरात्रि के अवसर पर शहर के प्रमुख मां दंतेश्वरी माता मंदिर, मां शीतला मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में ज्योति कलश की स्थापना की जाएगी। मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी डॉ. मंगलानंद झा ने बताया कि यह मंदिर खैरागढ़ का सबसे प्राचीन देवी मंदिर है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है और इस बार विक्रम संवत 2083 का नाम ‘रुद्र’ संवत्सर रहेगा। उन्होंने नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, लेकिन आश्विन और चैत्र नवरात्रि विशेष रूप से प्रमुख मानी जाती हैं। चैत्र नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है। मुहूर्त को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योति प्रज्वलन का कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता, बल्कि कलश स्थापना, नवग्रह, गौरी-गणेश, सप्तमातृका, षोडश मातृका और योगिनी की स्थापना के लिए निश्चित समय होता है। मां दंतेश्वरी मंदिर में दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना की जाएगी। इसके बाद शाम के समय श्रद्धालु अपने नाम से स्थापित ज्योति कलश प्रज्वलित करेंगे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार मां दंतेश्वरी मंदिर में इस वर्ष करीब 330 ज्योति कलश स्थापित किए जाएंगे, जबकि इतवारी बाजार स्थित मां शीतला मंदिर में लगभग 250 ज्योति कलश स्थापित होंगे। खास बात यह है कि मां दंतेश्वरी मंदिर में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार ज्योति प्रज्वलित करवाते हैं। अबू धाबी, जर्मनी और कनाडा जैसे देशों में रह रहे श्रद्धालु भी मंदिर से जुड़े रहते हैं और नवरात्रि में अपनी सहभागिता निभाते हैं। चैत्र नवरात्रि को लेकर पूरे खैरागढ़ में भक्ति और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।