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Wed. Apr 22nd, 2026

गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 

गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 
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गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 गंडई पंडरिया //  स्थानीय शासकीय महाविद्यालय गंडई में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

 

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इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों एवं वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए अपने गहन विचारो को साझा किये।

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इस संगोष्ठी में 140 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता कर शोधपत्र प्रस्तुत किए एवं अकादमिक विमर्श में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिये।

 

समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री अजय मंडावी उपस्थित रहे, जिन्होंने जनजाति शिल्प परम्परा को वर्तमान रोजगार से जोड़कर विकास के पथ पर बढ़ने की बात कही।गंडई महाविद्यालय में “विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हुआ मंथन 

संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. सुरेश पटेल ने अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में डॉ. महेश श्रीवास्तव, डॉ. भुवाल सिंह, डॉ. सियाराम शर्मा, डॉ. अवधेश श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

यह आयोजन महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. डी. पी. कुर्रे के कुशल नेतृत्व तथा प्राचार्य डॉ. एन. एस. वर्मा के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। संगोष्ठी में महाविद्यालय के अधिकारी कर्मचारी और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयास से सफल हुआ।

संगोष्ठी को सफल बनाने में नगर पंचायत अध्यक्ष लाल टाकेश्वर शाह खुशरो का भी विशेष योगदान रहा । महाविद्यालय में आयोजित यह पहला बड़ा राष्ट्रीय सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न होकर संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि एवं मील का पत्थर सिद्ध हुआ।


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रिपोर्ट : रोहित देवांगन, गंडई
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