बॉलीवुड के हर दूसरी फ़िल्म में होता था इस संगीतकार जोड़ी के संगीत, 635 से ज्यादा फिल्मो में दें चुके है music
प्रीति सिंह, गाजियाबाद
आज के दौर में जहां कोई संगीतकार साल में मुश्किल से 2 या 3 फिल्में करता है, वहीं एक समय ऐसा भी था जब बॉलीवुड की हर दूसरी फिल्म में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत गूंजता था। इस जोड़ी ने अपने करियर में 635 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया और ये एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड है जिसे आज तक कोई दूसरा संगीतकार छू भी नहीं पाया है।
इसी जोड़ी में से एक दिग्गज प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा का आज जन्मदिन है,
3 सितंबर 1940 को मुंबई में जन्मे प्यारेलाल जी के खून में ही संगीत था। इनके पिता पंडित रामप्रसाद शर्मा एक मशहूर तुरही वादक थे। उन्होंने ही प्यारेलाल को संगीत सिखाया। लेकिन किस्मत की परीक्षा देखिए घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि बहुत कम उम्र में प्यारेलाल जी को हाथों में वायलिन थामकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो और शादियों में बजाना पड़ा ताकि घर का चूल्हा जल सके।
वे रोज़ाना 8 से 12 घंटे वायलिन का कड़ा रियाज करते थे और इसी जिद और लगन ने उन्हें बहुत कम उम्र में वेस्टर्न क्लासिकल और भारतीय संगीत दोनों का मास्टर बना दिया।
मुंबई की ही सुरेंद्रनाथ एकेडमी में प्यारेलाल की मुलाकात लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर।दोनों की माली हालत एक जैसी थी और संगीत की समझ भी बेमिसाल थी। दोनों गहरे दोस्त बन गए और सालों तक बड़े संगीतकारों जैसे कल्याणजी-आनंदजी और सचिन देव बर्मन के सहायक के रूप में काम किया।
प्यारेलाल भारत छोड़ जाना चाहते थे ऑस्ट्रिया
लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्यारेलाल जी वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक में इतने माहिर थे कि वे भारत छोड़कर ऑस्ट्रिया के वियना शहर जाकर सेटल होना चाहते थे, ताकि वहां के बड़े सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा का हिस्सा बन सकें।
वे सब कुछ फाइनल कर चुके थे, लेकिन उनके जोड़ीदार लक्ष्मीकांत ने उनका हाथ पकड़ा और कहा कि हम जो भी करेंगे, यहीं भारत में मिलकर करेंगे।
इस दोस्ती की जिद के कारण प्यारेलाल जी रुक गए और फिर इतिहास गवाह है कि दोनों ने मिलकर बॉलीवुड पर तीन दशकों तक राज किया।
इस जोड़ी के काम करने का अपना अलग अंदाज था,
लक्ष्मीकांत जी गाने की धुन गुनगुनाकर बनाते थे और सिंगर्स जैसे लता जी या किशोर कुमार से गाना गवाते थे…
प्यारेलाल जी का काम इसके बाद शुरू होता था। वे उस धुन का म्यूजिक अरेंजमेंट करते थे। गाने के बैकग्राउंड में कौन सा इंस्ट्रूमेंट कब बजेगा, वायलिन की तान कब आएगी, सिम्फनी कैसी होगी..ये सब प्यारेलाल जी सीधे कागज पर नोट्स लिखकर तैयार कर देते थे।।
हॉलीवुड के संगीतकार भी हैरान रहते थे कि कोई इंसान बिना कंप्यूटर के, 100 से ज्यादा म्यूजिशियंस से लाइव रिकॉर्डिंग में एक साथ इतनी परफेक्ट धुन कैसे निकलवा सकता है।
बतौर संगीतकार इस जोड़ी की पहली फिल्म साल १९६३ में आई पारसमणि थी, जब लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल अपनी इस फिल्म को बना रहे थे, और उनके पास बड़े सिंगर्स को देने के लिए पैसे नहीं थे। तब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी दोनों इस जोड़ी की प्रतिभा से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने बिना एक पैसा लिए इस फिल्म के गाने गाए, जो आगे चलकर ब्लॉकबस्टर साबित हुए।
फिल्म अमर अकबर एंथनी का ये गाना माई नेम इज एंथनी गोंजाल्विस…आज भी हर महफिल की जान है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एंथनी गोंजाल्विस कोई काल्पनिक नाम नहीं था। गोवा के रहने वाले एंथनी गोंजाल्विस असल में प्यारेलाल जी के वायलिन गुरु थे।
प्यारेलाल जी अपने गुरु का बहुत आदर करते थे। जब इस गाने की धुन बनी, तो उन्होंने अमिताभ बच्चन के किरदार का नाम अपने गुरु के नाम पर रखकर उन्हें ट्रिब्यूट दिया था..
आज के समय में एक गाने को रिकॉर्ड करने में कई दिन लग जाते हैं। लेकिन 70 और 80 के दशक में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का क्रेज ऐसा था कि वे सुबह एक स्टूडियो में किशोर कुमार के साथ, दोपहर में दूसरे स्टूडियो में लता जी के साथ और शाम को किसी तीसरे स्टूडियो में रफ़ी साहब के साथ गाना रिकॉर्ड कर रहे होते थे..
उन्होंने अपने करियर में 635 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है।
उन्होंने बॉबी, कर्ज, मिस्टर इंडिया, तेजाब और राम लखन जैसी फिल्मों में ऐसा संगीत दिया जिसे आज भी लोग गुनगुनाते हैं।
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने फिल्मफेयर के इतिहास में सबसे ज्यादा 25 बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का नामांकन हासिल किया, जिसमें से 7 बार उन्होंने ट्रॉफी अपने नाम की।
उनके सुपरहिट एल्बम्स की लिस्ट में दोस्ती, मिलन, कर्ज, बॉबी, सत्यम शिवम सुंदरम, सरगम और मिस्टर इंडिया शामिल हैं।
भारतीय संगीत में उनके 6 दशकों से ज्यादा के इसी अभूतपूर्व योगदान को सलाम करते हुए भारत सरकार ने साल 2024 में प्यारेलाल शर्मा जी को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण से नवाजा।

साल 1998 में लक्ष्मीकांत जी का अचानक निधन हो गया। इस बात से प्यारेलाल जी को इतना दुख पहुंचा कि उन्होंने फिल्मों में अकेले संगीत देना बंद कर दिया। उनका कहना था कि लक्ष्मीकांत के बिना यह जोड़ी अधूरी है।
फिल्मों से दूर होने के बाद भी प्यारेलाल जी संगीत से जुड़े रहे। उन्होंने कुछ इंटरनेशनल सिम्फनी शोज़ किए और ओम शिव शक्ति जैसे प्राइवेट एल्बमों पर काम किया।
आज भी, जब हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और सुरीले संगीतकारों का नाम लिया जाता है, तो प्यारेलाल जी का नाम सबसे ऊपर की कतार में आता है।![]()
प्यारेलाल जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं…
आपको लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी का कौन सा गाना सबसे ज्यादा पसंद है?
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