छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 साल्हेवारा// वनांचल में लगातार दो दिनाें से हो रही बारिश के चलते साल्हेवारा स्थित 54 साल पुराना जलाशय का बंधान फूट गया। बंधान के फूटने से बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई। गंडई से साल्हेवारा होते हुए मलाजखंड जाने वाली मुख्य मार्ग में आवाजाही बंद गया है। आसपास 20 एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। वहीं बताया जा रहा की लगभग 18 घरों में पानी घुस गया और दो कच्चे मकान ढह गए।
बांध फूटने बाद बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित होने के से दो लोग फंस गए हैं। इसके अलावा कुछ मवेशियों के बह जाने की खबर आई है। बाढ़ के हालत से कच्चे मकानों को क्षति पहुँची परंतु राहत की खबर यह है कि किसी प्रकार की जनहानि नही हुई। इस दौरान स्थानीय विधायक यशोदा वर्मा, कलेक्टर गोपाल वर्मा, एसपी अंकिता शर्मा सहित पूरा जिला प्रशासन की टीम राहत और बचाव कार्य मे जुट गई। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने पीड़ित परिवार के सभी सदस्यों के लिए साल्हेवारा मंगल भवन, रीपा के शेड और वन विभाग के गोदाम में ठहरने की व्यवस्था की है।

54 साल पुराना है बांध..
मिली जानकारी अनुसार उक्त डेम का निर्माण 1969 में हुआ है। मतलब यह बांध 54 साल पुराना है। इसकी क्षमता 0.26 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) है, जिसका उपयोग लोग निस्तारी और मछली पालन के लिए करते थे। सिंचाई के लिए अनुमति नहीं थी। बांध में पहले से ही 70 फीसदी जलभराव था, लेकिन पिछले दो दिनों से वनांचल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बांध में जल स्तर बढ़ा और बंधान टूट गया। बताया गया कि सुबह बांध हल्का पानी निकल रहा था, लेकिन दोपहर तक बंधान ही फूट गया।
घर की छतों में चढ़कर बचाई जान..छत पर गुजारे रात
अचानक बांध के टूटने से खेतों से होते हुए पानी बस्ती में घुस आया। कई घरों में पानी घुसने के कारण लोग अपने घर की छतों में चढ़कर जान बचाए। उन्हें पूरी रात छत पर ही गुजारनी पड़ी।
साल भर पहले भी टूटा था बंधान
जानकारी के मुताबिक एक साल पहले भी इस डेम का बंधान टूट गया था। जल संसाधन विभाग के अफसरों की माने तो डेम की लाइफ समाप्त हो चुकी है। बहुत पुराना होने के कारण बंधान कमजोर हो गया है। बता दें कि बांध में लगभग 11 मीटर पानी भरा था।
कलेक्टर व विधायक ने लिया जायजा
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बाढ़ की खबर सुनते ही अलर्ट जारी किया और पूरी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे। सबसे पहले बचाव और राहत कार्य का जायजा लिया। बांध के टूटे हुए हिस्से में जाकर जलभराव की स्थिति का आँकलन किया। कलेक्टर ने बस्ती के पीड़ित बिहारी, रामबाई, सरवरी बाई, बंशीला, परदेशी, समारू निषाद, सुकन्या धुर्वे, पुरन पटेल, दिलीप पटेल, चैन पटेल सहित अन्य सभी लोगों के घर-घर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया और तत्काल राहत शिविर में पहुँचाने के निर्देश दिए।
राहत शिविर में की पीड़ितों के रहने खाने की व्यवस्था
जिला में लगातार वर्षा के कारण बांध टूटने से बाढ़ की पानी से प्रभावित साल्हेवारा के निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति निर्मित हुई थी। इससे कच्चे मकानों को क्षति पहुँची है परंतु राहत की खबर यह है कि किसी प्रकार की जनहानि नही हुई। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने पीड़ित परिवार के सभी सदस्यों के लिए साल्हेवारा मंगल भवन, रीपा के शेड और वन विभाग के गोदाम में ठहरने की व्यवस्था की है। इस दौरान उन्हें नाश्ता, गद्दे, चादर और कम्बल वितरित किया गया। खाने की पूरी व्यवस्था ग्राम पंचायत भवन में कई गई है। राहत शिविर की निगरानी और आकस्मिक व्यवस्था के लिए एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और कोटवार की ड्यूटी लगाई गई है।
प्रशासन की टीम लेगी नुकसानी का जायजा
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने सभी सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया बाढ़ से नुकसानी का जायजा लेगी इसके लिए सभी स्थल पर उपस्थित रहेंगे और गाँवो में जाकर पीड़ितों से सम्पर्क कर नुकसानी का जायजा लेगे।
इस राहत और बचाव कार्य के दौरान नीला के राजीव युवा मितान क्लब के सभी सदस्य, आसपास के पंचायत के सरपंच, पंच, महिला समूह के सदस्य, रीपा के स्वयं सेवी महिलाएं सभी इस कार्य में आगे आकर मदद की है।
इस दौरान पूर्व विधायक गिरवर जंघेल, समाजसेवी गजेंद्र ठाकरे, जनपद उपाध्यक्ष ललित महोबिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासन को ओर से एसपी अंकिता शर्मा, अपर कलेक्टर डीएस राजपूत, उप पुलिस अधीक्षक नेहा पांडेय, एसडीएम रेणुका रात्रे, तहसीलदार नेहा ध्रुव, थानेदार रामनरेश यादव, सिचाई विभाग के ई. ई. मनोज पराते, डॉ. मक़सूद, संजय देवांगन सहित पटवारी, कोटवार, मीडिया के लोग अन्य समाज सेवी व ग्रामवासी उपस्थित थे।
