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रथ यात्रा पर रथ में नहीं कांधे पर सवार होते है भगवान जगन्नाथ..हजारों भक्तों ने किया दर्शन 

रथ यात्रा पर रथ में नहीं कांधे पर सवार होते है भगवान जगन्नाथ..हजारों भक्तों ने किया दर्शन 
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छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ // जहाँ देश भर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा रथ में निकलता है लेकिन खैरागढ़ जिले के ग्राम पांडादाह में रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ स्वामी भक्तों के कांधे पर बैठकर मंदिर की परिक्रमा करते है। 

रथ पर नहीं कंधे पर सवार हो करते है मंदिर की परिक्रमा 

 जिला मुख्यालय खैरागढ़ क्षेत्र के 8 किमी दूर ग्राम पाड़ादाह में स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिर निर्माण का किस्सा बड़ा रोचक है। कहते है की इस ऐतिहासिक मंदिर को ओड़िसा के कंबल बेचने वालों ने सालों पहले बनवाया था। आज यह मंदिर पूरे अंचल में आस्था का एक बड़ा केन्द्र बना हुआ है और यहां भगवान जगन्नाथ को पूरी की तरह रथ बिठाकर भ्रमण नहीं कराया जाता बल्कि भक्तों- पुजारियों के कंधे पर बैठकर जगन्नाथ मंदिर परिसर की परिक्रमा करते हैं।

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रथ यात्रा पर रथ में नहीं कांधे पर सवार होते है भगवान जगन्नाथ..हजारों भक्तों ने किया दर्शन 

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परंपरा तोड़ने पर होती है अनहोनी 

मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि किसी ने भी इस परंपरा को तोडने का प्रयास किया, उसके साथ अनहोनी हुई है। इसलिए पूर्वजों के बताए गए परंपरा के अनुसार ही रथयात्रा का पर्व मनाया जाता है।

तीन दिवसीय रहा इस बार आयोजन 

इस बार भी यहां तीन दिवसीय उत्सव मनाया जा रहा है 6 जुलाई को अखंड राम संकीर्तन की शुरुआत की गई जिसमे लगातार 24 घंटे पाठ किया गया वही 7 जुलाई को 11 बजे संकीर्तन का समापन करने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर नेत्र दर्शन किया गया और भगवान जगन्नाथ को कंधे पर बिठाकर मंदिर परिसर की परिक्रमा कराई गई।

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कंबल बेचने वालों ने बनवाया था भगवान जगन्नाथ का मंदिर 

मंदिर की ऐतिहासिकता की बात करें तो पूर्व में पांडादाह रियासत हुआ करता था। इस रियासत में ओड़िशा के व्यापारी कम्बल बेचने आते थे और भगवान कृष्ण पर आधारित भजन प्रस्तुत करते थे। भजन की शानदार प्रस्तुति होती थी। आसपास के गांव में इसकी चर्चा होने लगी थी। रानी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने फेरी वालों को अपने दरबार में बुलाया। व्यापारियों ने कृष्ण भजन की प्रस्तुति दी और उन्ही से मिले धन से मंदिर का निर्माण कराया।

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रानी ने जारी किया हुक्मनामा.. दो-दो रूपये का नजराना 

रानी को भजन इतना अच्छा लगा कि उन्होंने क्षेत्र में हुक्मनामा जारी कर दिया कि जितने भी मालगुजार हैं, वे इन भजन गायकों को दो-दो रूपए नजराना के तौर पर देंगे। इस तरह व्यापारी कंबल बेचने के साथ ही गांव-गांव में भजन-कीर्तन करने लगे। इससे व्यापारियों के पास बहुत सारा धन एकत्रित हो गया।रथ यात्रा पर रथ में नहीं कांधे पर सवार होते है भगवान जगन्नाथ..हजारों भक्तों ने किया दर्शन 

एकत्रित धन से मंदिर निर्माण का राजा के पास रखा प्रस्ताव

व्यापारियों ने क्षेत्र की जनता का स्नेह देखकर राजा के पास प्रस्ताव रखा कि वे पाड़ादाह में भगवान जगन्नाथ का मंदिर बनाएंगे। मंदिर के अध्यक्ष पंडित मिहिर झा ने बताया कि मंदिर बनाने वाले व्यापारियों को भगवान ने स्वप्न में कहा था कि वे रथ में सवार होकर बाहर नहीं बल्कि मंदिर परिसर में ही परिक्रमा करेंगे। इसके बाद से परंपरा चल रही है कि भगवान को रथ पर नहीं बिठाते बल्कि पुजारी परिवार के सदस्य कंधे पर बिठाकर मंदिर परिसर में ही भ्रमण कराते हैं।… देखें विडियो..




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