छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 राजनांदगांव // बारिश में रेत की निकासी नहीं होगी इसको देख रेत तस्करों द्वारा डोंगरगढ़ ब्लॉक के मुड़पार गांव में बड़ी मात्रा में बिना रॉयल्टी पर्ची के रेत का भंडारण किया गया था। यहाँ अलग-अलग जगहों में लाखों रुपए की लगभग 800 हाइवा रेत भंडारण किया था। मामले की शिकायत पर डोंगरगढ़ एसडीएम उमेश पटेल ने रेत की जब्ती बनाई थी। जब्त रेत को एसडीएम द्वारा सप्लायर व बिल्डर को बेचने का आरोप लगा और मामले की शिकायत कांग्रेसियों द्वारा कलेक्टर व पुलिस से की है। वही जानकारी आई की एसडीएम ने कार्यवाई के नाम पर सिर्फ 59 हाइवा का करीब डेढ़ लाख रुपए जुर्माना जमा किया है।
कलेक्टर ने जाँच टीम किया गठित..
मामले की शिकायत बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जांच के लिए एक टीम गठित की है। जांच टीम मौके पर पहुंच जांच शुरू कर दी है वही एसडीएम उमेश पटेल को नोटिस जारी किया है। उन्हें सात दिन में मामले को लेकर जवाब मांगा गया है।

20 से 22 हजार हाइवा बिक रही बाजार में रेत, 59 हाइवा का डेढ़ लाख जुर्माना
बाजार में इन दिनों रेत प्रति हाइवा 20 से 22 हजार रुपए की दर में बिक रही है। रेत गबन मामले का खुलासा होने के बाद एसडीएम द्वारा रेत उठाव करने वालों से सिर्फ 59 हाइवा रेत का खनिज विभाग में रॉयल्टी व जुर्माना जमा कराया गया है। जिसमें सिर्फ डेढ़ लाख रुपए जमा करने की जानकारी सामने आई है। जबकि रेत की कीमत 20 से 22 हजार प्रति हाइवा है। ऐसे में किस दर पर डेढ लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है। इस पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद इस मामले में कुछ और परत खुलने की संभावना है।
जांच टीम पहुंची एसडीएम दफ्तर, खंगाले दस्तावेज
कलेक्टर द्वारा एडीएम सीएल मारकंड़े के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। टीम शनिवार को मुढ़पार गांव पहुंची और मौके का निरीक्षण किया। वहीं टीम द्वारा ग्रामीणों का बयान दर्ज कर पंचनामा तैयार किया गया है। टीम मुढ़पार के बाद डोंगरगढ़ स्थित एसडीएम दफ्तर भी पहुंची और दस्तावेजों की जांच की है। जांच के बाद मामले में एसडीएम की भूमिका सामने आएगी। बताया जा रहा है कि नियमानुसार जब्त रेत को एसडीएम को खनिज विभाग को सौंपना था।
यह था पूरा मामला..
मुड़पार इलाके में सड़क किनारे करीब 800 हाईवा रेत डंप की गई थी। रेत के अवैध भंडारण की सूचना के बाद डोंगरगढ़ एसडीएम उमेश पटेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने रेत भंडारण करने वालों की जानकारी जुटाई। लेकिन रेत डंप करने वाला कोई भी सामने नहीं आया। जिसे देखते हुए एसडीएम पटेल ने उक्त रेत को जब्त किए जाने का आदेश जारी कर दिया।
वही जब्त रेत को मौके से हटाने के लिए एसडीएम ने आदेश भी जारी कर दिया। उन्होंने राजनांदगांव निवासी प्रतीक अग्रवाल और बेलगांव निवासी लेखराम साहू को जब्त रेत हटाने का लिखित आदेश दिया। इसके बाद कोटवारों की मौजूदगी में दोनों ठेकेदार ने करीब 800 हाईवा जब्त किए गए रेत को मौके से हटा दिया। लेकिन दोनों ठेकेदार रेत कहां लेकर गए इसका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि 7 से 8 सौ ट्रिप हाईवा रेत अचानक कहां गायब हो गई। समूचे मामले में एसडीएम ने जब्त रेत के संबंध में खनिज विभाग को भी जानकारी देना जरूरी नहीं समझा जबकि रेत उठाव के लिए दी गई प्रतिलिपि में खनिज विभाग को विधिवत रूप से सूचित करना था। खनिज विभाग का नियम यह है कि गौण खनिजों के जब्ती से लेकर नीलामी की प्रक्रिया में विभाग को सूचित करने का प्रावधान है। चर्चा यह भी है कि सप्लायरों ने डंप रेत को बाजार में महंगे दाम पर बेच दिया है। इससे राज्य सरकार को लाखों रुपए के राजस्व से हाथ धोना पड़ गया।
इस मामले पर जाँच अधिकारी एसडीएम सीएल मारकंडे ने मिडिया में बताया की रेत मामले की जांच चल रही है। शनिवार को मुढ़पार पहुंच कर ग्रामीणों का बयान दर्ज किया गया।
