हनुमान जी का साक्षात चमत्कार हैं बाबा नीम करौली
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
फिल्म हनुमान अंश तो आपने देख ही ली होगी, लेकिन आज मैं आपको बाबा नीम करौली की ऐसी सच्ची कहानी सुनाऊँगी जो शायद ही आपने सुनी होगी, क्योंकि फ़िल्म मैंने नहीं देखी है तो पूरी जानकारी के साथ नहीं कह सकती कि फ़िल्म में बाबा के जीवन का ये हिस्सा दिखाया गया है या नहीं…
लेकिन हाँ, बिना किसी बड़े सुपरस्टार और भारी प्रमोशन के, सिर्फ 2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 24 दिनों में 12 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाकर बॉक्स ऑफिस पर जो चमत्कार किया है, उसने सबको बाबा की महिमा का कायल बना दिया है।
खैर, फिल्म की सफलता तो एक तरफ है, लेकिन मैं आपको बाबा के उस चमत्कार की सच्ची कहानी सुनाती हूँ जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे.
ये घटना द्वितीय विश्व युद्ध के समय की है। एक बुजुर्ग सेठ-सेठानी का इकलौता बेटा ब्रिटिश सेना में सैनिक था और बर्मा फ्रंट पर युद्ध लड़ रहा था। माता-पिता अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर बेहद परेशान रहते थे।
एक दिन, नीम करौली बाबा अचानक उनके घर पहुंचे और रात में वहीं रुक गए उस रात बाबा आराम से सो नहीं पाए।
वे पूरी रात कंबल ओढ़कर चारपाई पर छटपटाते रहे और दर्द से बुरी तरह कराहते रहे, मानो कोई उन्हें बहुत मार रहा हो।
बुजुर्ग दंपति रातभर बाबा की सेवा करते रहे और सोचते रहे कि महाराज-जी को अचानक क्या हो गया है
सुबह होते ही बाबा बिल्कुल ठीक हो गए। उन्होंने उठकर अपना कंबल को समेटा, जो भारी लग रहा था…
बाबा ने सेठ से कहा, इस कंबल को बिना खोले, सीधे जाकर गंगा जी में बहा दो।
जब सेठ कंबल लेकर जा रहे थे, तो उन्हें महसूस हुआ कि कंबल के अंदर लोहे के कई छोटे-छोटे टुकड़े या गोलियां जैसी चीजें भरी हुई हैं।
लेकिन बाबा की आज्ञा मानकर उन्होंने बिना देखे उसे गंगा में बहा दिया।
जाने से पहले बाबा ने कहा, “चिंता मत करो, तुम्हारा बेटा सुरक्षित है और एक महीने में लौट आएगा
ठीक एक महीने बाद उनका बेटा सकुशल घर लौट आया। माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
जब उन्होंने बेटे से युद्ध का अनुभव पूछा, तो उसने एक हैरान करने वाली घटना बताई
करीब एक महीने पहले एक ऐसी रात आई थी जब दुश्मनों ने मुझे चारों तरफ से घेर लिया था। मेरे बाकी सभी साथी मारे गए।
मैं एक गड्ढे या झाड़ी में छिप गया। दुश्मन लगातार मुझ पर अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे थे। गोलियां सीधे मेरी तरफ आ रही थीं, लेकिन तभी मुझे महसूस हुआ कि किसी अदृश्य शक्ति ने मुझे चारों तरफ से घेर रखा है।
गोलियां मेरे शरीर को छू भी नहीं पा रही थीं, मानो कोई उन्हें अपने ऊपर ले रहा हो। मैं पूरी रात मौत के मुंह में था,
लेकिन सुबह जब हमारी सेना की मदद आई तो मैं सही-सलामत बच गया।
जब बेटे ने उस खौफनाक रात की तारीख और समय बताया, तो माता-पिता दंग रह गए।
ये तो वही रात थी जब नीम करौली बाबा उनके घर पर रुके थे..
तब सेठ और उनके परिवार को समझ आया कि बाबा ने दूर बर्मा के युद्ध के मैदान में उनके बेटे पर चलीं सैकड़ों गोलियों के वार खुद अपने कंबल पर झेल लिए थे।
गोलियों की उस तपन और चोट के कारण ही बाबा रातभर तड़पते रहे थे और सुबह उन्होंने उन गोलियों से भारी हुए कंबल को गंगा में बहाने को कहा था..
अगर आप बाबा के बारे में ज्यादा नहीं जानते, तो आपको बता दूं कि उन्हें हनुमान जी का साक्षात स्वरूप माना जाता है..
बाबा जी ने 17 वर्ष की आयु में ही वैराग्य धारण कर लिया था और उनका नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था..
एक बार बिना टिकट होने पर एक बार टीसी ने उन्हें नीम करौली गांव के स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया। लेकिन बाबा के उतरते ही ट्रेन आगे नहीं बढ़ी।
जब अधिकारियों ने अपनी गलती मानकर बाबा से माफी मांगी, तब जाकर ट्रेन चली। तभी से उनका नाम नीम करौली बाबा पड़ गया..
उन्होंने नैनीताल के पास प्रसिद्ध कैंची धाम आश्रम बनाया, जहां स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसी दुनिया की सबसे बड़ी हस्तियां भी दर्शन करने जाते हैं..
फ़िल्म तो अब सुपरहिट हो चुकी है लेकिन इसमें एक बात गौर करने वाली है कि डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने इस फ़िल्म की सफलता के पीछे सेट पर निभाई आध्यात्मिकता बताई है..
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि फ़िल्म हनुमान अंश की शूटिंग के दौरान फ़िल्म प्रोड्यूसर, प्रेमानंद महाराज जी के पास गए थे..
तब महाराज जी ने कहा था कि आपकी फ़िल्म में जो लीड एक्टर बाबा का किरदार निभायेंगे उन्हें जिंदगी में पूरी तरह शाकाहारी रहना चाहिए और अपने आचरण को पवित्र रखना चाहिए।
महाराज जी की बात मानकर पूरी शूटिंग के दौरान सेट पर सिर्फ शुद्ध शाकाहारी भोजन ही बनता था और शराब-मांसाहार पर पूर्ण प्रतिबंध था।
सेट पर किसी को भी अपशब्द कहने, लड़ाई या बहस करने की अनुमति नहीं थी।
हर दिन शूटिंग की शुरुआत और अंत हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के साथ होता था।
डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने आगे बताया कि फिल्म के प्रमोशन के लिए उनके पास बजट नहीं था। इसलिए उन्होंने बाबा के संदेश को फैलाने के लिए 8 बड़े भंडारों का आयोजन किया, जो अपने आप में इस फिल्म का प्रमोशनल कैंपेन बन गए।’![]()
टॉक्सिक और आवारापन 2 जैसी बड़ी और चर्चित फिल्मों की चर्चाओं के बीच हनुमान अंश का महज़ वर्ड ऑफ़ माउथ और आस्था के दम पर करोड़ों का बिज़नेस करना यह साबित करता है कि आज भी दर्शक सच्ची और आध्यात्मिक कहानियों पसंद करते हैं…
जय हो बाबा नीम करौली महाराज की 🙏
अगर आपने ये फ़िल्म देखी है तो बताइए कैसी लगी आपको..
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