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अष्टमी पर देवी मंदिरों में अष्टमी हवन..नव कन्याओँ को खिलाया गया भोज..

अष्टमी पर देवी मंदिरों में अष्टमी हवन..नव कन्याओँ को खिलाया गया भोज..
अष्टमी पर देवी मंदिरों में अष्टमी हवन..
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छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ / छुईखदान / गंडई // चैत्र नवरात्रि पर्व उत्साह से मनाया जा रहा है। जगह-जगह मंदिर में ज्योति जंवारा रखे गए हैं। मंदिरों को सजाया गया है।

नवरात्रि पर्व के अष्टमी पर देवी मंदिरों में सुबह से अष्टमी हवन में बड़ी संख्या में पहुँचे भक्तों ने पूजन के बाद हवन कुंड में आहूति डाली। शहर सहित ग्रामीण इलाकों के देवी मंदिरों में अष्टमी हवन में हजाराें भक्त शामिल हुए।

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शहर के रियासत कालीन दंतेश्वरी मंदिर, ईतवारी बाजार स्थित शीतला मंदिर, महामाया, बम्लेश्वरी मंदिर, दाउचौरा के शीतला मंदिर, धरमपूरा स्थित शनिधाम सहित विभिन्न देवी मंदिरों में सुबह से अष्टमी हवन की तैयारी पूरी कर प्रारंभ किए गए।

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इस दौरान हवन प्रक्रिया संपन्न होने के बाद भक्तों ने देवी मंदिरों में मनोकामना ज्योतिकलश के दर्शन भी किए। रियासत कालीन देवी मंदिर दंतेश्वरी में सुबह 9 बजे से हवन प्रारंभ किया गया। ईतवारीबाजार स्थित शीतला मंदिर में दोपहर 12 बजे से हवन कार्यक्रम आयोजित किया। ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न देवी मंदिरों में भी दोपहर बाद अष्टमी हवन शाम तक चलता रहा।

इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की बड़ी भीड़ और उपस्थिति को देखते अन्य व्यवस्था भी बनाई गई थी। अष्टमी हवन के बाद देवी मंदिरों के साथ साथ भक्तों ने अपने घरों में कन्या भोजन का आयोजन कराया।

अष्टमी पर देवी मंदिरों में अष्टमी हवन..नव कन्याओँ को खिलाया गया भोज..
अष्टमी पर देवी मंदिरों में अष्टमी हवन..

इसी तरह ही छुईखदान में महाअष्टमी हवन किया गया। नगर के मां काली मंदिर, संतोषी मंदिर, शीतला मंदिर, वैष्णव देवी मंदिर, श्यामपुर शीतला मंदिर, लक्ष्मणपुर शीतला मंदिर, कोडका महामाया मंदिर में जोत जगमगा रहे हैं।

मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं के लिए भंडारा.. यहाँ बैठा कर परोसते है भोजन 

काली मंदिर में पंचमी और अष्टमी में भंडारे का आयोजन होता है। पंचमी में रात को कई वर्षों से सुदीप श्रीवास्तव के द्वारा भंडारा कराया जा रहा है। वहीं अष्टमी के दिन शाम से लेकर रात तक काली मंदिर के भक्तों द्वारा भंडारा कराया जाता है। काली मंदिर के नीचे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ मनीष बघेल द्वारा भी भंडारा का आयोजन किया जाता है। वहीं वैष्णव देवी मंदिर टिकरीपारा में भी अष्टमी के दिन भंडारे का आयोजन होता है। वहीं कडरापारा शक्ति मंदिर में लोगों को बिठाकर भोजन परोस्ते है।

इसी तरह ही गंडई के माँ गंडई मंदिर में भी विधिविधान से पूजन हवन किया गया माता के भक्त मंत्रोचार के साथ सांखला क़ी आहुति डाली और आशीर्वाद माँगा।

अष्टमी पर देवी मंदिरों में अष्टमी हवन..नव कन्याओँ को खिलाया गया भोज..
नव कन्याओँ को खिलाया गया भोज..

शीतला मंदिर में कराया गया नव कन्या भोज..

इतवारी बाजार स्थित माँ शीतला मंदिर में नवकन्याओ का चरण धो पैरों में आलता लगाया फिर माता स्वरूप नव कन्याओ का पूजन करते हुए श्रृंगार दिया गया।




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खैरागढ़ में चैत्र नवरात्र की तैयारी पूरी, कल होगी ज्योति कलश स्थापना खैरागढ़। नगर सहित पूरे क्षेत्र के देवी मंदिरों में चैत्र नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार से प्रारंभ हो रहे वासंती नवरात्रि के अवसर पर शहर के प्रमुख मां दंतेश्वरी माता मंदिर, मां शीतला मंदिर सहित सभी देवी मंदिरों में ज्योति कलश की स्थापना की जाएगी। मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी डॉ. मंगलानंद झा ने बताया कि यह मंदिर खैरागढ़ का सबसे प्राचीन देवी मंदिर है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है और इस बार विक्रम संवत 2083 का नाम ‘रुद्र’ संवत्सर रहेगा। उन्होंने नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, लेकिन आश्विन और चैत्र नवरात्रि विशेष रूप से प्रमुख मानी जाती हैं। चैत्र नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है। मुहूर्त को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योति प्रज्वलन का कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता, बल्कि कलश स्थापना, नवग्रह, गौरी-गणेश, सप्तमातृका, षोडश मातृका और योगिनी की स्थापना के लिए निश्चित समय होता है। मां दंतेश्वरी मंदिर में दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना की जाएगी। इसके बाद शाम के समय श्रद्धालु अपने नाम से स्थापित ज्योति कलश प्रज्वलित करेंगे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार मां दंतेश्वरी मंदिर में इस वर्ष करीब 330 ज्योति कलश स्थापित किए जाएंगे, जबकि इतवारी बाजार स्थित मां शीतला मंदिर में लगभग 250 ज्योति कलश स्थापित होंगे। खास बात यह है कि मां दंतेश्वरी मंदिर में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार ज्योति प्रज्वलित करवाते हैं। अबू धाबी, जर्मनी और कनाडा जैसे देशों में रह रहे श्रद्धालु भी मंदिर से जुड़े रहते हैं और नवरात्रि में अपनी सहभागिता निभाते हैं। चैत्र नवरात्रि को लेकर पूरे खैरागढ़ में भक्ति और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।