फसल बचाने खेत में बिछाया करंट,चपेट में आया हाथी शावक की मौत !
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 अंबिकापुर। सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र के अलकापुरी जंगल में फसल बचाने के लिए खेत के आसपास लगाए गए कथित करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से हाथी शावक की मौत हो गई। घटना बुधवार रात करीब 10 बजे कक्ष क्रमांक पी-2027 के पास की बताई जा रही है। वन विभाग ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है। अब जांच का केंद्र यह है कि करंट वाली व्यवस्था किसने तैयार की और शावक की मौत के लिए इसकी क्या भूमिका रही।
दो बैटरियों से तार में प्रवाहित किया जा रहा था करंट..
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए तार को दो बैटरियों से जोड़े जाने की बात सामने आई है। आशंका है कि इसी करंट प्रवाहित तार की चपेट में हाथी शावक के पैर और सूंड आ गए, जिससे उसकी मौत हुई।
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घटना के बाद वन अमला मौके पर पहुंचा और तार, बैटरियों तथा कनेक्शन से संबंधित सामग्री को जब्त कर जांच के दायरे में लिया। विभाग यह भी पता लगा रहा है कि यह व्यवस्था कब बनाई गई थी और इसे लगाने तथा संचालित करने में किन लोगों की भूमिका थी।
सरपंच के परिवार की जमीन होने की बात, भूमिका अलग से जांच के घेरे में..
जिस खेत के आसपास यह तार लगाया गया था, वह झिरमिटी सरपंच चंदन एक्का और उनके परिवार से संबंधित भूमि बताई जा रही है। हालांकि, भूमि से संबंध होना अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं करता। वन विभाग जमीन के स्वामित्व के साथ-साथ तार लगाने, बैटरी जोड़ने और करंट प्रवाहित करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस प्रकरण के पीछे कौन था और किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
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हाथी की मौत पर वन्यजीव कानून में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान..
भारतीय हाथी Wild Life (Protection) Act, 1972 की अनुसूची-I में शामिल है। कानून की धारा 2(16) में किसी वन्यजीव को मारना, जहर देना या ऐसा करने का प्रयास करना ‘हंटिंग’ की परिभाषा में आता है। धारा 9 संरक्षित वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाती है।
ऐसे मामले में यदि जांच से यह साबित होता है कि जानबूझकर या प्रतिबंधित तरीके से करंट की ऐसी व्यवस्था की गई थी और उससे अनुसूची-I के वन्यजीव की मौत हुई, तो धारा 51 के दंडात्मक प्रावधान लागू हो सकते हैं। वर्तमान कानून में अनुसूची-I से जुड़े अपराधों के लिए दोषसिद्धि की स्थिति में सामान्य मामलों की तुलना में अधिक कठोर सजा का प्रावधान है। हालांकि, इस मामले में अंतिम धाराएं और आरोप जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों, आरोपियों की भूमिका और अभियोजन की कार्रवाई के आधार पर तय होंगे।![]()
27 हाथियों का दल अब भी क्षेत्र में, वन विभाग की बढ़ी निगरानी..
घटना के बाद इलाके में मौजूद करीब 27 हाथियों के दल को लेकर वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। विभाग के अनुसार हाथियों का दल अलकापुरी क्षेत्र में विचरण कर रहा है और शावक की मौत के बाद काफी देर तक घटनास्थल के आसपास मौजूद रहा।
ग्रामीणों ने रातभर हाथियों के चिंघाड़ने की आवाजे सुनने की बात कही है। इससे आसपास के गांवो में भय का माहौल बना रहा। वन अमला हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है और ग्रामीणों को दल के नजदीक नही जाने तथा रात के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
पोस्टमार्टम और बिसरा रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह..
वन विभाग ने मृत हाथी शावक का पोस्टमार्टम कराया है। मौत के कारण की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए बिसरा और अन्य आवश्यक नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। घटनास्थल से मिले तार और बैटरियों की भी जांच की जा रही है। इन जांचों से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि शावक की मौत विद्युत प्रवाह से हुई या कोई अन्य कारण भी इसमें शामिल था।

फसल सुरक्षा के नाम पर करंट बना वन्यजीवों के लिए खतरा..
इस घटना ने हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में फसल बचाने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेतों के आसपास खुले तार में करंट प्रवाहित करने की व्यवस्था केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है। विशेषकर हाथी कॉरिडोर या हाथियों की नियमित आवाजाही वाले क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था से मानव-वन्यजीव संघर्ष और बढ़ने की आशंका रहती है। Ambikapur News
दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब साक्ष्यों पर टिकी आगे की कार्रवाई..
वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। अब जांच में तार लगाने, बैटरियों से कनेक्शन करने और करंट प्रवाहित करने की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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हाथी शावक की मौत के मामले में वन्यजीव संरक्षण कानून की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की दिशा तय हो चुकी है, लेकिन अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।


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