कर्मचारियों के रीलिफ होने से कलेक्टोरेट में पसरा सन्नाटा.. काम काज के लिए लोग
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ // कार्यालय खुला है, कुर्सिया जमी है, लोग आ जा रहे है, लेकिन काम करने वाले लोग नही है जिसके चलते लोग मायूस लौट रहे है। ये नजारा है खैरागढ़ स्थित जिला कार्यालय का जहा लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की मूल पदस्थापना वाली जगहों पर रवानगी आदेश से कलेक्टोरेट कार्यालय के समूचा काम काज लगभग ठप्प पड़ गया है।
दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा पिछले दिनों ही गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के संलग्नीकरन को समाप्त करते हुए आदेश जारी कर एक सप्ताह के भीतर मूल संस्था मे ज्वाइन कर ऑनलाइन उपस्थिति देने कहा है जिसके बाद जनप्रतिनिधियों को कार्यालयीन काम काज के लिए मिले कर्मचारी के साथ ही कलेक्टोरेट, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और बीईओ कार्यालय के कर्मचारियों की मूल संस्था में वापसी हो गया है।
आदेश के साथ ही कार्यालयीन काम काज के लिए शिक्षा विभाग से विधायक यशोदा वर्मा को मिले दो और जिपं अध्यक्ष प्रियंका ताम्रकार के पास के एक कर्मचारी कलेक्टोरेट के 27, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के 12 और बीईओ कार्यालय के 3 कर्मचारियों को भी रीलिफ कर दिया गया है जिसके चलते अब मूल संस्था में वापसी वाले गैर शैक्षणिक कर्मचारियो की संख्या 47 हो गई है।
सालों से मूल संस्था से अलग हटकर काम करने वाले शिक्षा विभाग के बाबूओ मे संचालनालय के उक्त आदेश को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है हालांकि कारवाई के डर से वो वापस लौट तो गए है, लेकिन आने वाले समय मे शैक्षणिक स्टाफ को पुराना आदेश होने के बाद भी संलग्र कर काम लेने वाले अधिकारियों को लेकर उनकी भड़ास निकल सकती है। वहीं प्रतिनियुक्ति को लेकर भी उनका कहना है कि जब उनको मूल जगह वापस भेजा जा रहा तो बाकियो के लिए विभाग रहमदिल क्यो दिखा रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यालयीन काम काज के लिए 20 कर्मचारियों को सेट अप स्वीकृत है। नए जिले में कार्यालयीन काम काज संपादन को लेकर जिले के अलग-अलग हाई और हायर सेकंडरी स्कूल में कार्यरत बाबूओ को संलग्र किया गया था, लेकिन संचालनालय के आदेश मानने की बाध्यता के चलते 12 कर्मचारियों को रीलिफ करना पड़ा और अब महज चार बाबूओ के सहारे शिक्षा विभाग का जिला कार्यालय टिका हुआ है। रीलिफ होने वाले हर बाबू के पास तीन से चार विभाग का काम था उनकी रवानगी के बाद अब बचे चार बाबूओ को उन विभागो का काम भी देखना पड़ रहा है जिसके चलते काम का दबाव बढ़ गया है। |
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प्रतिनियुक्ति और शैक्षणिक की वापसी की उठी मांग
नए जिले में कर्मचारियो की कमी के चलते सरकारी काम काज के लिए शिक्षा विभाग के गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को जिला कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और ब्लाक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में काम की अधिकता के चलते विभाग के गैर शैक्षणिक स्टाफ को संलवा कर काम लिया जा रहा था। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 14 जुलाई को जारी आदेश में उन्हें मूल संस्था में उपस्थिति आनलाइन एप के माध्यम से नही देने पर जुलाई महीने का वेतन रोकने, अनुशासनात्मक कारवाई और निर्धारित समय सीमा में ज्वाइनिंग नही देने के बाद उनके कार्यभार वाहण तक की तिथि को ब्रेक इन सर्विस संबंधी प्रस्ताव भेजने कहा था।
उक्त आदेश के पालन को लेकर कर्मचारियों में भी इस बात को लेकर नाराजगी है कि जिनके पास उन्होंने सालों काम किया वही अधिकारी संचालनालय के आदेश का अक्षरशः पालन करने तत्पर दिखे। दबे स्वर में कर्मचारियों ने कहा कि जिस तरीके से संचालनालय ने गैर शैक्षणिक की वापसी को लेकर तानाशाही दिखाई है वैसे ही प्रतिनियुक्ति समाप्त करने और शैक्षणिक स्टाफ की वापसी को लेकर भी तत्परता दिखाए ताकि उन्हे यह महसूस ना हो कि उनके साथ विमाग ने दुहरा रवैया अपनाया है। उनका कहना है कि नीति सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। यदि प्रशासनिक जरूरतों के कारण प्रतिनियुक्ति आवश्यक है तो विभाग को इसकी स्पष्ट नीति और कारण सार्वजनिक करना चाहिए।
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