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लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश के बाद विधायक और जिपं अध्यक्ष के कार्यालयों से भी स्टाफ की वापसी, 46 गैर-शैक्षणिक कर्मचारी हुए रिलीव

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लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश के बाद विधायक और जिपं अध्यक्ष के कार्यालयों से भी स्टाफ की वापसी, 46 गैर-शैक्षणिक कर्मचारी हुए रिलीव

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश के बाद जिले में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर वापसी की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके तहत कलेक्टोरेट, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालयों के साथ-साथ विधायक एवं जिला पंचायत अध्यक्ष के कार्यालयों में कार्यरत शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी वापस भेज दिए गए हैं। इससे विभिन्न कार्यालयों के प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

कलेक्टोरेट, DEO और BEO कार्यालय से गए मूल संस्था में

जारी आदेश के अनुसार कलेक्टोरेट से 27, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 11 तथा बीईओ कार्यालय से 3 कर्मचारियों को उनकी मूल संस्था में भेजा गया है। वहीं कार्यालयीन कार्य के लिए प्रतिनियुक्ति पर तैनात विधायक यशोदा वर्मा के कार्यालय के 2 तथा जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियंका ताम्रकार के कार्यालय के 1 कर्मचारी को भी रिलीव कर दिया गया है। इस तरह जिले में अब तक कुल 46 गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की मूल संस्था में वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है।

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गौरतलब है कि नए जिले के गठन के बाद कर्मचारियों की कमी को देखते हुए शिक्षा विभाग के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों में संलग्न कर कार्य लिया जा रहा था। लेकिन लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 14 जुलाई को जारी आदेश के बाद सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा में मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।  colletoret kgh

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में मूल संस्था में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराने वाले कर्मचारियों का जुलाई माह का वेतन रोका जा सकता है। साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई और कार्यभार ग्रहण में विलंब होने पर ‘ब्रेक इन सर्विस’ संबंधी प्रस्ताव भी भेजे जाने की बात कही गई है।

इस कार्रवाई को लेकर कर्मचारियों में असंतोष भी देखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति तत्काल समाप्त की जा रही है, तो अन्य प्रतिनियुक्तियों और शैक्षणिक कर्मचारियों के मामले में भी समान नीति अपनाई जानी चाहिए। उनका मानना है कि विभाग को सभी वर्गों के लिए एक समान नियम लागू करने चाहिए, ताकि किसी प्रकार के दोहरे मापदंड की स्थिति न बने। कर्मचारियों ने प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिनियुक्ति की स्पष्ट और पारदर्शी नीति जारी करने की भी मांग की है।




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