Sat. Aug 1st, 2026

हनईबन में किसानों का महापंचायत, करीब हजारों किसान हुए शामिल

हनईबन में किसानों का महापंचायत, करीब हजारों किसान हुए शामिल
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हनईबन में किसानों का महापंचायत, करीब हजारों किसान हुए शामिल

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़// दनिया-अतरिया-उदयपुर-हनईबन परिक्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन और सीमेंट फैक्टरी परियोजना के विरोध में शनिवार को हनईबन में आयोजित किसान महापंचायत कई बाधाओं के बावजूद संपन्न हुई।

किसान अधिकार संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा पहले से प्रक्रिया निरस्त होने के लिखित आदेश मौजूद होने के बावजूद महापंचायत को कमजोर करने के उद्देश्य से पुलिसिया घेराबंदी और भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।

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हनईबन जाने वाले मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए और मजगांव, कालेगोंदी, जगमड़वा सहित कई गांवों में कोतवालों के माध्यम से मुनादी कराई गई कि महापंचायत स्थगित हो चुकी है, जिससे किसानों में भ्रम और भय का माहौल बना।

अनुमति के बावजूद भारी पुलिस बल, 3–4 किमी पैदल चलकर पहुंचे किसान

किसानों का कहना है कि महापंचायत शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित होनी थी, जिसके लिए प्रशासन से अनुमति भी ली गई थी, इसके बावजूद भारी पुलिस बल की तैनाती कर किसानों को रोका गया।

गोकना–बागुर, भुरभूसी, गंडई चौक और रैमडवा क्षेत्रों में कड़ी पुलिस जवान रखी गई। इसके चलते जहां 10 हजार किसानों के पहुंचने की संभावना थी, वहां करीब 1000 से 1500 किसान ही महापंचायत स्थल तक पहुंच सके। बावजूद इसके कई किसान और महिलाएं 3 से 4 किलोमीटर पैदल चलकर सभा स्थल तक पहुंचे और संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

हनईबन में किसानों का महापंचायत, करीब हजारों किसान हुए शामिल

निरस्त निर्णयों का श्रेय लेने की कोशिश पर किसानों का तीखा विरोध

महापंचायत के दौरान आरोप लगाया गया कि कुछ नेता पहले से निरस्त की जा चुकी संडी जनसुनवाई और हनईबन नीलामी का श्रेय लेने के लिए भ्रम फैला रहे हैं, जबकि यह निर्णय 6 दिसंबर की ट्रैक्टर रैली और किसानों के दबाव का परिणाम है। किसानों ने इसे उनके आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया।

SDM ने कहा पूरी परियोजना को रद्द करने की मांग राज्य शासन को भेजी जा रही है

करीब 3 बजे एसडीएम मौके पर पहुंचे, जहां किसानों ने ज्ञापन सौंपकर लिखित जवाब मांगा। 15 मिनट के भीतर एसडीएम ने लिखित उत्तर देकर बताया कि 6 तारीख को ग्रामीणों और किसानों के द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार शासन द्वारा संडी जनसुनवाई स्थगित, हनईबन ब्लॉक नीलामी निरस्त करने का फैसला 9 तारीख को ले लिया गए था। और पूरी परियोजना को रद्द करने की मांग राज्य शासन को भेजी जा रही है।

तीन बड़े फैसले: आंदोलन जारी, 24 जनवरी को अगली महापंचायत और 24 घंटे का अल्टीमेटम

महापंचायत में तीन अहम फैसले लिए गए- परियोजना पूरी तरह निरस्त होने तक आंदोलन जारी रहेगा, 24 जनवरी को विचारपुर भाटा में अगली महापंचायत आयोजित होगी और किसान अधिकार संघर्ष समिति का विस्तार कर नए गांवों के प्रतिनिधियों व सरपंचों को कार्यकारिणी में शामिल किया गया तथा मन्नू चंदेल और संजू चंदेल को समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया। साथ ही जनप्रतिनिधियों को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया कि वे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि वे परियोजना के पक्ष में हैं या विरोध में। किसानों ने साफ कहा कि अब भ्रम, दबाव और आधे फैसले स्वीकार नहीं होंगे और यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।

परियोजना स्थायी रूप से निरस्त नहीं होती, तब तक जारी रहेगा संघर्ष 

किसान अधिकार संघर्ष समिति अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि हनईबन नीलामी और संडी जनसुनवाई का निरस्त होना यह साबित करता है कि जब किसान संगठित होकर सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक अपनी बात मजबूती से रखते हैं, तो शासन को झुकना पड़ता है। यह केवल एक नीलामी रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि हमारी जमीन, पानी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा की दिशा में पहली बड़ी जीत है। हम साफ कहना चाहते हैं कि जब तक दनिया-अतरिया-उदयपुर-हनईबन पूरे परिक्षेत्र की परियोजना स्थायी रूप से निरस्त नहीं होती, तब तक किसान अधिकार संघर्ष समिति का संघर्ष जारी रहेगा।

अंचल की अस्मिता और अस्तित्व की है यह लड़ाई

किसान अधिकार संघर्ष समिति संरक्षक गिरवर जंघेल ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे अंचल की अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई है। किसानों ने शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संगठित तरीके से यह साबित कर दिया कि जनभावना के खिलाफ कोई भी परियोजना थोपी नहीं जा सकती। नीलामी और जनसुनवाई का निरस्त होना किसानों की ताकत का प्रमाण है, लेकिन आधे फैसलों से हमें संतोष नहीं है। हमारी स्पष्ट मांग है कि पूरी खनन और सीमेंट फैक्टरी परियोजना को हमेशा के लिए बंद किया जाए।

बड़े नेता और जनप्रतिनिधि सार्वजनिक करे किसके पक्ष में है 

किसान अधिकार संघर्ष समिति संयोजक सुधीर गोलछा ने कहा कि हनईबन महापंचायत में लिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम किसी को धमकी देने के लिए नहीं, बल्कि जनता के सामने सच्चाई स्पष्ट करने के लिए दिया गया है। हम चाहते हैं कि क्षेत्र के सभी बड़े नेता और जनप्रतिनिधि अपने लेटरपैड पर सार्वजनिक रूप से यह साफ करें कि वे दनिया-अतरिया-उदयपुर-हनईबन परिक्षेत्र में प्रस्तावित खनन और सीमेंट फैक्टरी परियोजना के पक्ष में हैं या किसानों और ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। यदि तय समय सीमा में स्पष्ट रुख सामने नहीं आता है, तो किसान इसे जनभावना की अनदेखी मानेगा और आंदोलन को और व्यापक व तेज किया जाएगा।

A farmers’ grand meeting was held in Hanaiban, with thousands of farmers attending.




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