छत्तीसगढ़ के भरदा कला हाई स्कूल की नई इमारत एक साल से बंद, बिजली-पानी और सड़क के अभाव में शुरू नहीं हुई पढ़ाई
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ // सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करके तैयार की गई नई स्कूल इमारतें केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं, इसका एक बानगी चित्र सामने आया है। छत्तीसगढ़ के भरदा कला स्थित हाई स्कूल की नई इमारत बनकर और उसका विधिवत लोकार्पण हुए एक साल बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ अब तक पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है।
बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण छात्रों को पुरानी जर्जर इमारत में या दूसरे स्कूल में तंग जगहों पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आखिर क्या है पूरा मामला? देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट।
भरदा कला और आसपास के कई गांवों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए नए हाई स्कूल का निर्माण कराया गया था। लगभग एक साल पहले इस इमारत का लोकार्पण भी हो चुका है। लेकिन लोकार्पण के बाद न तो प्रशासन ने इसे अपने कब्जे में लिया और न ही यहाँ कक्षाएं शुरू हो सकीं।
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स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निष्क्रिय सरपंच, शाला समिति और प्रशासन की अनदेखी की वजह से यह इमारत आज धूल फांक रही है। घटिया निर्माण कार्य के कारण शुरुआत में ही इमारत की टाइल्स उखड़ने लगी हैं और परिसर के सामने बड़े-बड़े गड्ढे होने से बच्चों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ![]()
इमारत के सामने बड़ा गड्ढा है कभी भी कोई बड़ा हो सकता है हादसा
निर्मल कोसरे स्थानीय निवासी ने कहना है की “लोकार्पण हुए एक साल हो गया है, लेकिन स्कूल का कामकाज या बच्चों की पढ़ाई अभी तक शुरू नहीं हुई है। इमारत के सामने बड़ा गड्ढा है, कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अलग से शौचालय भी अभी अधूरा है। एक ही स्कूल में मिडिल स्कूल के बच्चों को भी बैठाया जा रहा है, जिससे सभी को परेशानी हो रही है। समस्या सिर्फ इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल तक जाने के लिए पक्की सड़क भी नहीं है। बारिश के दिनों में यह पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। इसके अलावा, स्कूल में बिजली का कनेक्शन नहीं है और पीने के पानी की व्यवस्था के लिए भी दो-तीन दिन पहले ही खुदाई करके शुरुआत करने की कोशिश की गई है। |
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स्कूल की जगह का चुनाव ही गलत
कौशल कोसरे स्थानीय निवासी ने कहा की स्कूल की जगह का चुनाव ही गलत किया गया है। वहां जाने के लिए कोई सही रास्ता नहीं है। अगर सरपंच या प्रशासन ने समय रहते इस ओर ध्यान दिया होता, तो भरदा कला और आसपास के गांवों के सैकड़ों बच्चों को इसका लाभ मिलता। लेकिन आज बच्चे उधार की और जर्जर इमारत में बैठने को मजबूर हैं।”
दो दिन पहले ही शुरू हुई है पानी की व्यवस्था
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प्राचार्य ओमप्रकाश सोनी ने बताया लोकार्पण तो कर दिया गया, लेकिन पूर्व सरपंच की तरफ से अभी तक हैंडओवर (Handover) नहीं मिला है। बिजली की सुविधा नहीं है, पानी की व्यवस्था दो दिन पहले ही शुरू हुई है और रास्ता भी नहीं बना है। इस्तेमाल न होने के कारण टाइल्स उखड़ रही हैं। फिलहाल हम प्राथमिक स्कूल की इमारत में ही कक्षाएं चला रहे हैं।