पत्थरों पर उकेरी पहचान: SCERT की कक्षा 8वीं की पुस्तक में शामिल हुई खैरागढ़ के कलाकार दंपति की शैल-कलाकृतियां
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़। कला तब अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करती है, जब वह केवल प्रदर्शनियों और दीर्घाओं तक सीमित न रहकर नई पीढ़ी की पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा बन जाए। खैरागढ़ के युवा मूर्तिकार धरम नेताम और मनीषा नेताम के लिए ऐसा ही गौरवपूर्ण क्षण आया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित कक्षा 8वीं की सहायक वाचन पुस्तक के “गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क” पाठ में उनके द्वारा निर्मित शैल-कलाकृतियों को स्थान दिया गया है। यह उपलब्धि केवल कलाकार दंपति की नहीं, बल्कि खैरागढ़ की समृद्ध कला परंपरा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का भी सम्मान है।
मनेंद्रगढ़ स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क अपनी भूवैज्ञानिक और वैज्ञानिक विशेषताओं के कारण देशभर में पहचान रखता है। करोड़ों वर्ष पुराने समुद्री जीवाश्मों के बीच विकसित इस पार्क को कलात्मक स्वरूप देने में खैरागढ़ के कलाकार दंपति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पार्क की प्राकृतिक विशाल चट्टानों पर 37 शैल-कलाकृतियों का निर्माण धरम नेताम और मनीषा नेताम ने किया है। इन कलाकृतियों में डायनासोर, प्रागैतिहासिक समुद्री जीवों और उस काल के प्राकृतिक परिवेश को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया है, जिससे यह स्थल विज्ञान, इतिहास और कला का अद्भुत संगम बन गया है।


कलाकार धरम नेताम बताते हैं कि इस परियोजना पर काम करना आसान नहीं था। प्राकृतिक चट्टानों पर कलाकृतियां गढ़ने में मौसम, पत्थरों की बनावट और तकनीकी चुनौतियों के बीच लगातार करीब 90 दिनों तक कठिन परिश्रम करना पड़ा। प्रत्येक आकृति को तैयार करने से पहले प्राचीन जीवों की संरचना, वैज्ञानिक तथ्यों और कलात्मक संतुलन का गहन अध्ययन किया गया, ताकि हर शिल्प अपनी वास्तविकता और सौंदर्य दोनों को अभिव्यक्त कर सके।
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धरम नेताम और मनीषा नेताम दोनों ने राजकुमारी इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2017 में मास्टर ऑफ आर्ट्स (स्कल्पचर) की उपाधि हासिल की। विश्वविद्यालय में मिली शैक्षणिक शिक्षा और वर्षों की साधना ने उन्हें शैल-शिल्प कला में विशिष्ट पहचान दिलाई। आज उनकी यही कला राज्य की स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनकर विद्यार्थियों तक पहुंच रही है।


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खैरागढ़ को देशभर में कला और संस्कृति की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां से निकले अनेक कलाकारों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। धरम नेताम और मनीषा नेताम की यह उपलब्धि उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाती है। उनकी कृतियों का पाठ्यपुस्तक में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि कला केवल संग्रहालयों या प्रदर्शनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह शिक्षा, समाज और आने वाली पीढ़ियों की सोच को भी समृद्ध करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क जैसे स्थलों में कला का समावेश विद्यार्थियों में इतिहास, भूविज्ञान, पर्यावरण और शिल्पकला के प्रति जिज्ञासा विकसित करता है। ऐसे में खैरागढ़ के कलाकारों की रचनाएं अब प्रदेशभर के लाखों विद्यार्थियों के लिए अध्ययन, प्रेरणा और गर्व का विषय बनेंगी।
धरम नेताम और मनीषा नेताम की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि समर्पण, सृजनशीलता और निरंतर अभ्यास से स्थानीय कलाकार भी अपने कार्य को राष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं। खैरागढ़ की धरती से निकली यह कला अब राज्य की पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगी और लंबे समय तक प्रेरणा देती रहेगी।
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