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IKSVV के साथ इंडियन जूट इंडस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन की साझेदारी से कोलकाता में हुआ फ़ैशन एग्जिबिशन

प्राकृतिक रेशों से तैयार परिधानों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरा जलवा, केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने की सराहना
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IKSVV के साथ इंडियन जूट इंडस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन की साझेदारी से कोलकाता में हुआ फ़ैशन एग्जिबिशन

प्राकृतिक रेशों से तैयार परिधानों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरा जलवा, केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने की सराहना

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़। खैरागढ़ की पहचान अब केवल संगीत और कला तक सीमित नहीं रही है। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए परिधानों ने पहली बार राष्ट्रीय फैशन मंच पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 19 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित अशोका होटल में आयोजित इस एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं फैशन एग्जिबिशन में ‘इजिरा’ द्वारा लगाए गए स्टॉल में विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए डिजाइनर कलेक्शन प्रदर्शित किया गया, जिसने ग्रीन फैशन और सस्टेनेबल टेक्सटाइल की नई दिशा प्रस्तुत की।

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यह उपलब्धि इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय और इंडियन जूट इंडस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन के बीच अप्रैल 2026 में हुए एमओयू का प्रतिफल है। समझौते के बाद यह पहला अवसर रहा जब खैरागढ़ विश्वविद्यालय का डिजाइन कलेक्शन राष्ट्रीय स्तर के फैशन मंच तक पहुंचा। प्रदर्शित परिधानों के लिए फैब्रिक कोलकाता स्थित संस्था में तैयार किए गए जबकि उन्हें आकर्षक और आधुनिक डिजाइन देने का कार्य विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया।

 

3 से 4 सप्ताह में तैयार होता है प्राकृतिक फाइबर फैब्रिक

इज़िरा के निदेशक डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि फ्लैक्स, रेमी, सिसल, बांस, पाइनएप्पल फाइबर और बनाना हेम्प जैसे प्राकृतिक रेशों से धागे तैयार किए गए। अत्याधुनिक तकनीक और रचनात्मक डिजाइन के माध्यम से इन रेशों को आधुनिक फैशन एवं लाइफस्टाइल उत्पादों का स्वरूप दिया गया।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रेशों से कपड़ा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया लगभग तीन से चार सप्ताह में पूर्ण होती है। इसके तहत केले के तने, जूट तथा अन्य पौधों से बारीक रेशे निकाले जाते हैं। धुलाई और सुखाने के बाद उनसे धागा तैयार किया जाता है, जिसे आगे वस्त्र निर्माण में उपयोग किया जाता है।

 

केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने की प्रशंसा

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने विश्वविद्यालय के कार्यों की सराहना करते हुए छात्रों और संस्थान को कम समय में उत्कृष्ट गुणवत्ता के परिधान तैयार करने के लिए बधाई दी। उन्होंने प्राकृतिक रेशों पर आधारित इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

 

एक माह में तैयार किया गया पूरा कलेक्शन

एग्जिबिशन के लिए विश्वविद्यालय के छात्रों ने मात्र एक माह के भीतर भारतीय और पश्चिमी शैली के कई आकर्षक परिधान तैयार किए। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने बताया कि आगामी दो से तीन महीनों में छात्रों का अध्ययन दल जूट उद्योग का दौरा करेगा जहां उन्हें प्राकृतिक रेशों से धागा और वस्त्र निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि वह स्वयं इस आयोजन में शामिल होना चाहती थीं, लेकिन देश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर शासन द्वारा जारी सीमित यात्रा संबंधी निर्देशों तथा राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशानुसार यात्रा में कटौती किए जाने के कारण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सकीं। हालांकि उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता कर छात्रों का उत्साहवर्धन किया।प्राकृतिक रेशों से तैयार परिधानों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरा जलवा, केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने की सराहना IKSVV के साथ इंडियन जूट इंडस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन की साझेदारी से कोलकाता में हुआ फ़ैशन एग्जिबिशन

 

प्राकृतिक संरक्षण के साथ फैशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

प्राकृतिक रेशों पर आधारित यह पहल न केवल पर्यावरण अनुकूल फैशन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि खैरागढ़ विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी दिला रही है। विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि कला, डिजाइन और नवाचार के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।




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