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सीमेंट प्लांट को लेकर फिर गरमाया माहौल, महिलाओं ने संभाला मोर्चा, किसानो की सहमति बिना प्रक्रिया बढ़ी तो बड़ा विरोध 

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सीमेंट प्लांट को लेकर फिर गरमाया माहौल, महिलाओं ने संभाला मोर्चा, किसानो की सहमति बिना प्रक्रिया बढ़ी तो बड़ा विरोध 

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़-छुईखदान // श्रीसीमेंट की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। प्रस्तावित जनसुनवाई दोबारा आयोजित किए जाने की चर्चा के बीच किसान अधिकार संघर्ष समिति ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। समिति ने स्पष्ट किया कि किसानों की असहमति के बावजूद यदि जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो क्षेत्र के किसान और ग्रामीण शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक विरोध करेंगे।

 

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समिति ने कहा कि उसका उद्देश्य प्रशासन से टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि किसानों की जमीन, पानी, पर्यावरण और आजीविका से जुड़े सवालों को शासन-प्रशासन के सामने रखना है। समिति के अनुसार दनिया, अतरिया, हनईबन, उदयपुर सहित आसपास का क्षेत्र कृषि प्रधान है और यहां बड़ी संख्या में परिवार खेती, पशुपालन एवं स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भर हैं।सीमेंट प्लांट को लेकर फिर गरमाया माहौल, महिलाओं ने संभाला मोर्चा, किसानो की सहमति बिना प्रक्रिया बढ़ी तो बड़ा विरोध 

 

समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्हें प्रशासन की ओर से जनसुनवाई की नई तारीख के संबंध में अभी कोई आधिकारिक पत्र या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि उनका दावा है कि कुछ गांवों में कंपनी से जुड़े लोगों की ओर से जनसुनवाई होने की बात कहकर संपर्क किए जाने की जानकारी मिली है। इसी के चलते समिति ने पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्णय लिया है।

समिति ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर जब तक नई तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक क वे किसी निश्चित तिथि का दावा नहीं कर रहे हैं। लेकिन यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो किसानों को संगठित कर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।

समिति ने कहा कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन, उपजाऊ कृषि भूमि और ग्रामीणों की आजीविका की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रशासन को जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले क्षेत्र के किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से सुनना चाहिए। समिति ने दोहराया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि किसानों की स्पष्ट असहमति के बावजूद जनसुनवाई कराने का प्रयास किया गया तो किसान, ग्रामीण और क्षेत्र की महिलाएं मिलकर व्यापक लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराएंगी।

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खनन से जमीन, पानी और आजीविका पर असर की आशंका

समिति ने कलेक्टर को दिए आवेदन में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना की जनसुनवाई रोकने और परियोजना निरस्त करने की मांग दोहराई है। समिति का कहना है कि खनन, ब्लास्टिंग, क्रशिंग और भारी वाहनों की आवाजाही से कृषि भूमि, जलस्रोत, भूजल, पर्यावरण और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। समिति ने जमीन खरीदी अथवा अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाने, किसानों पर दबाव या प्रलोभन संबंधी शिकायतों की जांच कराने तथा किसानों की आपत्तियों को प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की है।

और होगा आंदोलन तेज

इस बार प्रेसवार्ता में महिला सदस्यों ने प्रमुखता से अपनी बात रखी। समिति अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि जमीन और खेती से जुड़ा यह मुद्दा केवल पुरुष किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य से जुड़ा है। यदि किसानों की इच्छा के विपरीत जनसुनवाई आयोजित की गई तो क्षेत्र की महिलाएं भी आंदोलन में मजबूती से शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि माताएं-बहनें अब अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए मैदान में उतरने को तैयार हैं। प्रेसवार्ता में प्रियंका जंघेल, रश्मि जंघेल, बिमला विश्वकर्मा, तिजिया बाई, दुलेश्वरी, फूलबासन बाई, सातों बाई, ज्ञानिक जंघेल सहित अन्य महिलाएं मौजूद रहीं।

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जमीन खरीदी को लेकर भी उठाए सवाल

श्री सीमेंट के नाम जमीन की रजिस्ट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर समिति ने कहा कि वर्तमान में नई जमीन खरीदी के संबंध में उनके पास पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि समिति को जानकारी मिली है कि कुछ किसानों द्वारा पूर्व में किए गए जमीन सौदों की अब रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी की जा रही है। समिति ने मांग की कि जमीन से जुड़े सभी सौदों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि किसी किसान ने दबाव, प्रलोभन अथवा अनुचित प्रभाव में जमीन का सौदा किया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।




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