Sun. Jul 19th, 2026

Bihar Flood: बिहार के बाढ़.. गांव बने टापू.. नपाल से बिहार तक 2008 से भी बड़ी तबाही

Bihar Flood: बिहार के बाढ़.. गांव बने टापू.. नपाल से बिहार तक 2008 से भी बड़ी तबाही
खबर शेयर करें..

नेशनल खबर डेस्क पटना // इन दिनों गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान और गंगा समेत कई नदियां ऊफान पर हैं. लाखों लोगों की जिंदगी मुसीबत में है. लोगों को 2008 वाला डर सताने लगा है. दरअसल, बिहार में 2008 में आई तबाही के निशान अभी भी हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2008 में भयानक बाढ़ से 526 लोगों की मौत हुई थी. 

घर, सड़क, पुल और ऊंची इमारतों को मानो पानी ने लील लिया हो. लाखों जिंदगियां अचानक से बेसहारा हो गई हैं. आंख की जद तक चारों ओर सिर्फ पानी ही पानी है, जैसे ये कोई सूखा इलाका नहीं बल्कि किसी दरिया के बीच का कोई हिस्सा हो. ये नजारा इन दिनों बिहार के करीब 13 जिलों का है जहां नेपाल के रास्ते आ रही नदियों ने तबाही मचा रखी है. तबाही हर दिन और भयावह होती जा रही है. यह जलप्रलय देखकर लोगों को अब 1968 और 2008 की भयावह यादें ताजा होने लगी हैं.

2008 में आई थी तबाही…

इन दिनों गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान और गंगा समेत कई नदियां ऊफान पर हैं. लाखों लोगों की जिंदगी मुसीबत में है. लोगों को 2008 वाला डर सताने लगा है. दरअसल, बिहार में 2008 में आई तबाही के निशान अभी भी हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2008 में भयानक बाढ़ से 526 लोगों की मौत हुई थी. कई किसानों के खेत हमेशा के लिए बर्बाद हो गए थे, क्योंकि खेतों में बालू भर गया था. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि तब नेपाल की ओर से 2-3 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था.Bihar Flood: बिहार के बाढ़.. गांव बने टापू.. नपाल से बिहार तक 2008 से भी बड़ी तबाही

सोशल मिडिया से जुड़ने क्लिक करें..
telegram_logo_icon_168691 whatsapp-seeklogo[1] insta-png_5957085 facebook khabar 24x7 clipart1979393

इस बार क्यों है बड़ा खतरा

इस बार खतरा इसलिए ज्यादा बताया जा रहा है क्योंकि कोसी नदी पर बीरपुर (नेपाल) बैराज से 6.61 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो 56 वर्षों में सबसे अधिक है. वहीं 2008 के मुकाबले करीब 3 गुना है. वहीं, ये आंकड़ा 1968 में 7.88 लाख क्यूसेक के बाद सबसे बड़ा है. वहीं, गंडक पर वाल्मिकीनगर बैराज से 5.62 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जो 2003 के बाद सबसे अधिक है. 

अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर सहित गंगा के किनारे स्थित लगभग 13 जिले पहले से ही बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं और मूसलाधार बारिश के बाद नदियों के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में रहने वाले लगभग 13.5 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. प्रभावित जिलों से बड़ी संख्या में लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है.

अधिकारियों ने बताया कि बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर सहित गंगा के किनारे स्थित लगभग 13 जिले पहले से ही बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं और मूसलाधार बारिश के बाद नदियों के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में रहने वाले लगभग 13.5 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. प्रभावित जिलों से बड़ी संख्या में लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है.

जल संसाधन विभाग की टीमें 24×7 आधार पर तटबंधों की निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी कटाव या खतरे का पता चलते ही त्वरित कार्रवाई की जा सके. विभाग के तीन चीफ इंजीनियर, 17 एक्जक्यूटिव इंजीनियर, 25 असिस्टेंट इंजीनियर और 45 जूनियर इंजीनियर 24×7 आधार पर काम कर रहे हैं और हाई अलर्ट पर हैं. राज्य के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है.


खबर शेयर करें..

Related Post

error: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !!
Study point, kcg