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NITI Aayog की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, क्या सच में दिवालिया होने की राह पर है छत्तीसगढ़ ?

NITI Aayog की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, क्या सच में दिवालिया होने की राह पर है छत्तीसगढ़ ?
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NITI Aayog की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, क्या सच में दिवालिया होने की राह पर है छत्तीसगढ़ ?छत्तीसगढ़ के खजाने पर बढ़ता कर्ज का दबाव! क्या सच में दिवालिया होने की राह पर है राज्य? NITI Aayog की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 रायपुर। छत्तीसगढ़ की आर्थिक स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट और उससे जुड़े दावों ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है। सोशल मीडिया और एक वायरल वीडियो में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ दिवालिया होने की स्थिति की ओर बढ़ रहा है? इस दावे के पीछे NITI Aayog की वित्तीय रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है।

 

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हालांकि, NITI Aayog की रिपोर्ट को ध्यान से देखने पर तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन साथ ही भविष्य में कर्ज और राजकोषीय दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। इसलिए इसे सीधे तौर पर “राज्य दिवालिया होने वाला है” कहना रिपोर्ट की भाषा का सही अर्थ नहीं होगा।

 

NITI Aayog की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

NITI Aayog के Fiscal Health Index में राज्यों की वित्तीय स्थिति का आकलन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इनमें राजस्व जुटाने की क्षमता, खर्च की गुणवत्ता, राजकोषीय अनुशासन, कर्ज और debt sustainability जैसे प्रमुख संकेतक शामिल हैं।

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NITI Aayog की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में राजस्व जुटाने की क्षमता में सुधार देखने को मिला है। राज्य की अपनी आय में बढ़ोतरी हुई है और विकास से जुड़े खर्च में भी विस्तार हुआ है।NITI Aayog की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, क्या सच में दिवालिया होने की राह पर है छत्तीसगढ़ ?

 

लेकिन रिपोर्ट यह भी बताती है कि राज्य के खर्च की संरचना में कुछ ऐसी कठोरताएं बढ़ रही हैं, जिनसे भविष्य में सरकार के पास वित्तीय फैसलों के लिए उपलब्ध गुंजाइश कम हो सकती है। यानी कमाई बढ़ने के बावजूद खर्च का दबाव एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

 

क्या छत्तीसगढ़ पर कर्ज बहुत ज्यादा है?

NITI Aayog की छत्तीसगढ़ संबंधी विस्तृत रिपोर्ट में 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार राज्य का सार्वजनिक कर्ज GSDP का करीब 24 प्रतिशत था। यह उस समय राज्यों के औसत/मध्यक स्तर से कम था।

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इसी रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में राज्य का Fiscal Deficit GSDP का 3.2 प्रतिशत था, जबकि Revenue Surplus 0.6 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसका मतलब यह है कि उस समय राज्य की वित्तीय तस्वीर को पूरी तरह खराब या दिवालिया जैसी स्थिति कहना सही नहीं था।

 

लेकिन चिंता का एक बड़ा कारण Contingent Liabilities यानी संभावित देनदारियां हैं। NITI Aayog के आंकड़ों में यह 2021-22 में GSDP के करीब 4.8 प्रतिशत थी, जो राज्यों के मध्यक स्तर से काफी अधिक थी।

 

भविष्य को लेकर NITI Aayog ने क्यों जताई चिंता?

NITI Aayog की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Debt Sustainability Assessment है। रिपोर्ट में अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में debt-to-GSDP ratio के दबाव को लेकर गंभीर संकेत दिए गए हैं।

 

यानी वर्तमान स्थिति को देखते हुए तत्काल “दिवालिया” घोषित करने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यदि राजस्व की तुलना में खर्च और कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में वित्तीय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

 

2025-26 के आंकड़े भी क्या कहते हैं?

छत्तीसगढ़ के 2025-26 बजट विश्लेषण के अनुसार 2024-25 में राज्य का संशोधित राजकोषीय घाटा GSDP का लगभग 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। वहीं 2025-26 में इसे करीब 3.1 प्रतिशत तक रखने का लक्ष्य रखा गया।

 

सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा राज्य के outstanding debt का है। 2025-26 के अंत तक यह GSDP का लगभग 29.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि 2024-25 के संशोधित अनुमान में यह करीब 28.9 प्रतिशत था। राज्य ने 2027-28 तक इसे फिर से 24 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है।

 

CAG की रिपोर्ट ने भी वित्तीय स्थिति पर डाला फोकस

इसी बीच Comptroller and Auditor General यानी CAG ने छत्तीसगढ़ के 2024-25 के State Finances पर अपनी रिपोर्ट जुलाई 2026 में विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रदर्शन, घाटे, कर्ज की स्थिति, बजट प्रबंधन और सार्वजनिक खाते से जुड़े मामलों का विश्लेषण किया गया है।

 

इससे साफ है कि राज्य की वित्तीय स्थिति इस समय एक महत्वपूर्ण नीति और राजनीतिक मुद्दा है।

 

तो क्या छत्तीसगढ़ दिवालिया होने वाला है?

सीधा जवाब है –  अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।

 

NITI Aayog की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ को दिवालिया घोषित नहीं करती। बल्कि रिपोर्ट में राज्य की वित्तीय स्थिति के कई सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख है। समस्या मुख्य रूप से भविष्य में बढ़ते खर्च, कर्ज की स्थिरता और वित्तीय गुंजाइश पर पड़ने वाले दबाव को लेकर है।

 

दूसरी तरफ, हाल के बजट आंकड़े बताते हैं कि राज्य का कर्ज GSDP के मुकाबले बढ़ा है और राजकोषीय घाटे में भी उतार-चढ़ाव रहा है। इसलिए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह विकास योजनाओं और कल्याणकारी खर्च को जारी रखते हुए कर्ज और घाटे को नियंत्रित रखे।

 

असली सवाल अब यह है…

छत्तीसगढ़ के सामने सवाल केवल यह नहीं है कि राज्य पर कितना कर्ज है। असली सवाल यह है कि कर्ज के मुकाबले राज्य की कमाई और आर्थिक विकास की रफ्तार कितनी है और भविष्य में उस कर्ज को चुकाने की क्षमता कैसी रहेगी।

 

NITI Aayog की रिपोर्ट इसी दिशा में चेतावनी देती दिखाई देती है। इसलिए “छत्तीसगढ़ दिवालिया होने वाला है” जैसे सनसनीखेज दावे के बजाय यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि राज्य की वित्तीय स्थिति फिलहाल संभालने योग्य है, लेकिन बढ़ता कर्ज और खर्च का दबाव भविष्य के लिए सावधानी का संकेत दे रहा है।

 

आने वाले वर्षों में सरकार की राजस्व बढ़ाने की क्षमता, कर्ज प्रबंधन और खर्च की प्राथमिकताएं यह तय करेंगी कि छत्तीसगढ़ अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करता है या कर्ज का दबाव और बढ़ता है।  sourse..




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