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श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में युवाओं की हुंकार, 150 बाइक से कलेक्टोरेट पहुंचे करीब 300 क्षेत्रवासी, किया प्रेसवार्ता

श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में युवाओं की हुंकार, 150 बाइक से कलेक्टोरेट पहुंचे करीब 300 क्षेत्रवासीप्रेस वार्ता में कहा—रोजगार चाहिए, लेकिन किसानों की जमीन की कीमत पर नहीं; जनसुनवाई हुई तो आंदोलन और तेज करेंगे
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श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में युवाओं की हुंकार, 150 बाइक से कलेक्टोरेट पहुंचे करीब 300 क्षेत्रवासी, किया प्रेसवार्ता 

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ // दनिया-अतरिया-हनईबन-उदयपुर और आसपास के प्रभावित गांवों में प्रस्तावित श्री सीमेंट चूना पत्थर खनन परियोजना का विरोध अब युवा किसानों ने भी खुलकर तेज कर दिया है। मंगलवार को क्षेत्र के करीब 150 बाइक में सवार लगभग 300 युवा किसान व क्षेत्रवासी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और परियोजना के विरोध में ज्ञापन सौंपा।

प्रेस वार्ता में कहा- रोजगार चाहिए, लेकिन किसानों की जमीन की कीमत पर नहीं; जनसुनवाई हुई तो आंदोलन और तेज करेंगे

इस दौरान “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाते हुए युवाओं ने प्रस्तावित खनन एवं सीमेंट परियोजना को निरस्त करने की मांग की। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के बाद नवीन जिला पत्रकार संघ भवन में प्रेस वार्ता आयोजित कर युवाओं ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति, समाज या उद्योगपति के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसे विकास मॉडल के खिलाफ है जिसमें किसानों की उपजाऊ जमीन, पानी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य प्रभावित हो।

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श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में युवाओं की हुंकार, 150 बाइक से कलेक्टोरेट पहुंचे करीब 300 क्षेत्रवासीप्रेस वार्ता में कहा—रोजगार चाहिए, लेकिन किसानों की जमीन की कीमत पर नहीं; जनसुनवाई हुई तो आंदोलन और तेज करेंगे

“रोजगार चाहिए, लेकिन खेतों की कीमत पर नहीं”—टमाटर-चना प्रसंस्करण जैसे उद्योगों का दिया विकल्प

पत्रकारों ने जब सवाल किया कि बेरोजगार युवा रोजगार के लिए आंदोलन करते हैं और उद्योग आने से क्षेत्र में रोजगार मिलेगा, तो युवाओं ने कहा कि वे रोजगार के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना था कि क्षेत्र में टमाटर, चना और अन्य कृषि उपज आधारित प्रसंस्करण उद्योग लगाए जा सकते हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मिलेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।

युवाओं ने कहा कि जिस जमीन पर कई पीढ़ियों से खेती कर परिवारों की आजीविका चल रही है, उसे नष्ट करके रोजगार पैदा करना उचित नहीं है। उनका सवाल था कि ऐसा उद्योग क्यों न लगाया जाए जो किसान की जमीन को बचाते हुए किसान और युवा दोनों के हित में हो। उन्होंने कहा—“रोजगार चाहिए, लेकिन किसानों की कई पीढ़ियों की जमीन को खत्म करके नहीं।”

 

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“जनसुनवाई नहीं होने देंगे”—आंदोलन लगातार जारी रखने का ऐलान

प्रदर्शन के आगे की रणनीति को लेकर युवाओं ने स्पष्ट कहा कि उनका आंदोलन केवल ज्ञापन देने तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में परियोजना की जनसुनवाई दोबारा कराने का प्रयास हुआ तो किसान और युवा लगातार विरोध करेंगे। युवाओं ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे और किसानों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर जनसुनवाई कराने की कोशिश हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कंपनी की गतिविधियों के सवाल पर युवाओं ने कहा कि फिलहाल उन्हें कोई बड़ी गतिविधि नजर नहीं आ रही, लेकिन कंपनी से जुड़े लोगों की क्षेत्र में आवाजाही बढ़ी है, इसलिए ग्रामीण स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में युवाओं की हुंकार, 150 बाइक से कलेक्टोरेट पहुंचे करीब 300 क्षेत्रवासीप्रेस वार्ता में कहा—रोजगार चाहिए, लेकिन किसानों की जमीन की कीमत पर नहीं; जनसुनवाई हुई तो आंदोलन और तेज करेंगे

“चुने हुए प्रतिनिधि साथ नहीं तो दुर्भाग्य”—जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर युवाओं की नाराजगी

प्रेस वार्ता में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी युवाओं ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के जिन नेताओं को जनता ने चुनकर भेजा है, उनसे किसानों को उम्मीद थी कि वे जमीन, खेती और भविष्य के इस सवाल पर उनके साथ खड़े होंगे। युवाओं ने कहा कि यदि कोई चुना हुआ जनप्रतिनिधि किसानों की लड़ाई में सहयोग नहीं कर रहा है या परियोजना के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है तो यह क्षेत्रवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि “हमारे चुने हुए प्रतिनिधि यदि हमारा साथ नहीं दे रहे हैं तो क्षेत्र की जनता उनसे नाराज है और आने वाले समय में जनता उनके रुख को याद रखेगी।”

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उद्योग जरूरी है, लेकिन छत्तीसगढ़ महतारी की धरती की कीमत पर नहीं”—युवा किसानों का दो टूक संदेश

प्रेस वार्ता में युवाओं ने कहा कि उनका संघर्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है, लेकिन किसानों की जमीन, पानी, खेती और पर्यावरण के सवाल पर वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को विकास के ऐसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए जिसमें स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले और किसानों की जमीन भी सुरक्षित रहे। युवा वर्ग ने किसान अधिकार संघर्ष समिति के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि वे आगे भी संघर्ष में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। कार्यक्रम में विक्रम सिंह यादव, सौरभ जंघेल, बबलू, हुकूम, वीरेंद्र जंघेल, ज्ञानेंद्र जंघेल, वेदप्रकाश, चिरंजीव जंघेल सहित बड़ी संख्या में युवा किसान शामिल रहे। उनका अंतिम संदेश था—“उद्योग जरूरी है, रोजगार जरूरी है, लेकिन किसान की जमीन और छत्तीसगढ़ महतारी की धरती की कीमत पर नहीं।”

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फैक्ट्री लगी तो जीना मुश्किल हो जाएगा”—युवाओं ने जताई गहरी चिंता, बोले-जान देने की नौबत आई तो पीछे नहीं हटेंगे

प्रेस वार्ता के दौरान युवाओं ने परियोजना को लेकर अपनी चिंता बेहद भावुक अंदाज में रखी। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में सीमेंट फैक्ट्री और खनन शुरू हुआ तो किसानों की जमीन, खेती और पर्यावरण के साथ उनका भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा। युवाओं ने कहा, “अगर यहां फैक्ट्री लगी तो हमारे सामने जीने का संकट खड़ा हो जाएगा। हम प्रदूषण में मरना नहीं चाहते और अपनी जमीन तथा भविष्य को उजड़ते हुए भी नहीं देख सकते। ऐसी स्थिति पैदा हुई तो हम अपनी जान देने तक से पीछे नहीं हटेंगे।” युवाओं ने सरकार से अपील की कि किसी भी परियोजना पर फैसला लेने से पहले उन परिवारों के भविष्य को देखा जाए, जिनकी कई पीढ़ियों की आजीविका इसी जमीन पर निर्भर है।




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