धरमगढ़ सेवा सहकारी समिति में 37 लाख रुपए की अवैध धान खरीदी का खुलासा, प्रबंधक व ऑपरेटर पर FIR की तैयारी
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 कवर्धा // कलेक्टर गोपाल वर्मा के कड़े रुख के बाद जिले के धान उपार्जन केंद्रों में हड़कंप मचा हुआ है। कलेक्टर के निर्देश पर जारी सघन जांच अभियान के तहत खाद्य विभाग की टीम ने धरमगढ़ सेवा सहकारी समिति में बड़े पैमाने पर चल रहे धान खरीदी घोटाले का पर्दाफाश किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 37 लाख रुपए की कीमत का 1200 क्विंटल धान सिर्फ कागजों में खरीदा गया था। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को देखते हुए दोषी कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
पारदर्शिता से समझौता नहीं, गड़बड़ी करने वालों पर होगी जेल की कार्रवाई: कलेक्टर
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर गोपाल वर्मा ने स्पष्ट किया है कि शासन की धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा: “धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही, तौल में गड़बड़ी या वित्तीय हेरफेर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
भौतिक सत्यापन में खुली पोल: 40 किलो की जगह निकला आधा धान
जांच के दौरान जब टीम ने समिति प्रबंधक ललित सेंगर एवं ऑपरेटर राजकुमार ठाकुर की मौजूदगी में धान के बोरों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। आमतौर पर धान की भर्ती के निर्धारित मानक से अलग, एक बोरे का वजन मात्र 24.800 किलोग्राम पाया गया। रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक का मिलान करने पर भारी अंतर मिला, जिससे यह साफ हो गया कि कागजों में एंट्री कर सरकारी राशि का गबन करने का प्रयास किया जा रहा था।![]()

इन अधिकारियों की टीम ने की छापेमारीइस बड़े फर्जीवाड़े को पकड़ने वाली जांच टीम में खाद्य विभाग और सहकारिता विभाग के प्रमुख अधिकारी जिनमें मुख्य रूप से चन्द्रशेखर देवांगन (खाद्य अधिकारी), दलेश्वर साहू (सहायक खाद्य अधिकारी), अमित द्विवेदी, अनामिका ठाकुर, निधि वर्मा (खाद्य निरीक्षक), प्रवेश तिवारी (सहकारिता निरीक्षक) शामिल थे। |
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, धरमगढ़ समिति के प्रबंधक ललित सेंगर और ऑपरेटर राजकुमार ठाकुर के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया गया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जिले के अन्य सभी उपार्जन केंद्रों में भी इसी तरह का औचक निरीक्षण और जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।


