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सम्पुटित शिव स्तोत्रमाला शिवत्व की अनुभूति कराती एक आध्यात्मिक साधना यात्रा

Shravan Maas 2025: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, ऐसे करें शिव जी की आराधना
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सम्पुटित शिव स्तोत्रमाला शिवत्व की अनुभूति कराती एक आध्यात्मिक साधना यात्रा

भारतीय सनातन परंपरा में शिव को परम तत्व, संहारक और पुनर्निर्माण के अधिपति के रूप में पूजनीय माना गया है. शिव की आराधना न केवल मोक्षदायिनी मानी गई है, बल्कि यह भक्त को मानसिक, शारीरिक और आत्मिक बल भी प्रदान करती है. इसी गूढ़ तात्त्विक शिव-भक्ति को शब्दों में बाँधने का प्रयास है — सम्पुटित शिव स्तोत्रमाला

“स्तोत्रमाला” का अर्थ है:

स्तोत्रों की माला, यानी मंत्रात्मक शक्ति से युक्त उन स्तुतियों का समुच्चय, जिनका जप, पाठ या गान साधक के जीवन में शिवत्व की चेतना जागृत करता है. “सम्पुटित” शब्द यह दर्शाता है कि इन स्तोत्रों को विशेष क्रम, बीज मंत्रों और सम्पुट विधियों के साथ जोड़ा गया है, जिससे इनका प्रभाव कई गुना अधिक हो जाता है.

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यह स्तोत्रमाला उन भक्तों के लिए अमूल्य निधि है जो शिव की उपासना को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि शास्त्रीय और तांत्रिक दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं. इसमें पारंपरिक स्तोत्रों के साथ-साथ दुर्लभ मन्त्रों की सम्पुट-युक्त प्रस्तुति दी गई है — जैसे शिव पंचाक्षरी स्तोत्र, रुद्राष्टक, महामृत्युंजय मंत्र तथा अन्य शक्ति-सम्पन्न प्रार्थनाएँ.

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सम्पुट विधि से पाठ करने का विशेष महत्व यह है कि यह साधक के जप में लय, ऊर्जा और संकल्प शक्ति को एकीकृत करता है. इससे शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और साधना अधिक प्रभावशाली बनती है.

यह संग्रह उन सभी शिवभक्तों के लिए अत्यंत उपयोगी है:

जो नियमित रूप से शिव की आराधना करते हैं

जो कठिन परिस्थितियों से उबरने के लिए आध्यात्मिक उपाय खोज रहे हैं

या जो आत्मिक विकास और आंतरिक शांति की तलाश में हैं

सम्पुटित शिव स्तोत्रमाला केवल एक पाठ संग्रह नहीं, बल्कि शिव के दिव्य सान्निध्य का अनुभव कराने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा है — जहाँ हर मंत्र एक मोती है और हर स्तोत्र उसका धागा.Shravan Maas 2025: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, ऐसे करें शिव जी की आराधना

सम्पुटित शिव स्तोत्रमाला-

श्रीगणेशाय नमः.
ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
   देही शिवाय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय .
कर्पूरकान्तिधवळाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥१॥ 
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
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ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
            देही शिवाय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
गौरिप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय .
गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥२॥ 
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
——————–
ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
            देही शिवाय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
भक्तिप्रियाय भयरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय .
ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥३॥ 
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
——————
ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
            देही शिवाय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
चर्मांबराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय .
मञ्जीरपादयुगळाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥४॥ .
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
——————-
ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
            देही शिवाय नमः
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय .
आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥५॥ 
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
—————-
ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
            देही शिवाय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय .
नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥६॥ 
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
—————–
ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
            देही शिवाय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णव तारणाय .
पुण्येषु पुण्य़भरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥७॥ 
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
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ॐ लक्ष्मी प्रदाय ह्रीं ऋणमोचने श्री देही 
            देही शिवाय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय .
मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥८॥ 
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ . ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्बारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं .
  अजामलबद्बाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण भैरवाय .
मम दारिद्रय विद्बेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्..
नमाम्यहं. देवमजं पुराणमुपेन्द्रवेधोमरराजजुष्टम् .
शशाङ्कसूर्याग्निसमाननेत्रं वृषेन्द्रचिह्नं विलयादिहेतुम् ॥ ०९॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
सर्वेश्वरैकं त्रिदशैकबन्धुं ध्यानाधिगम्यं जगतोऽधिवासम् ॥
तं वाङ्मयाधारमनन्तशक्तिं ज्ञानार्णवं स्थैर्यगुणाकरं च ॥ १०॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
पिनाकपाशाङ्कुशशूलहस्तं कपर्दिनं मेघसहस्रघोषम् .
स्कालवूटं स्फटिकावभासं नमामि शम्भुं भुवनैकनाथम् ॥ ११॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
कपालिनं मालिनमादिदेवं जटाधरं भीमभुजङ्गहारम् .
प्रशासितारं च सहस्रमूर्तिं सहस्रशीर्षं पुरुषं वरिष्ठम् ॥ १२॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
यमक्षरं निर्गुणमप्रमेयं तं ज्योतिरेकं प्रवदन्ति सन्तः .
दूरङ्गमं वेदविदां च वन्द्यं सरवस्य हृत्स्थं परमं पवित्रम् ॥ १३॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
तेजोनिधिं बालमृगाङ्गमौलिं नमामि रद्रं स्फुरदुग्रवक्त्रम् .
कालेन्धनं कामदमस्तसङ्गं धर्मासनस्थं प्रकृतिद्वयस्थम् ॥ १४॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
अतीन्द्रियं विश्वभुजं जितारिं गुणत्रयातीतमजं निरीहम् .
मनोमयं वेदमयं च हंसं प्रजापतीशं पुरुहूतमिन्द्रम् ॥ १५॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
अनाहतैकध्वनिरूपमाद्यं ध्यायन्ति यं योगविदो यतीन्द्राः .
संसारपाशच्छिदुरं विमुक्त्यै पुनः पुनस्तं प्रणमामि नित्यम् ॥
 १६॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
न यस्य रूपं न बलप्रभावो न च स्वभावः परमस्य पुंसः .
विज्ञायते विष्णुपितामहाद्यैस्तं वामदेवं प्रणमाम्यचिन्त्यम् ॥ १७॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः .
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यासमृद्धिम् देही में दापय नमः.
ॐ ह्रीं दारिद्यदहनाय महादेवाय फट्.
शिवं समाराध्य यमुग्रमूर्ति पपौ समुद्रं भगवानगस्त्यः .
लेभे दिलीपोऽप्यखिलां स चोर्वीं तं विश्वयोनिं शरणं प्रपद्ये ॥ १८॥
ॐ शं शंकराय धनं देही देही ॐ.
ॐ श्रीं ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः 

यह पूर्ण रूप से वेब आधार है.. ग्रथ का अपना लग ही महत्व है।। 




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