FD पर नहीं घटेगा ब्याज, अब बैंक से लोन लेने वालों पर बढ़ेगा दबाव
अगर आपका पैसा FD में लगा है या आप बैंक से लोन लेने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी ये खबर अहम है. बैंकों में लोन लेने वालों की संख्या और कर्ज की मांग तेजी से ज्यादा हो रही है, लेकिन उस रफ्तार से पैसा जमा नहीं हो रहा. ऐसे में बैंकों को डिपॉजिट जुटाने के लिए FD पर ब्याज दरों में बड़ी कटौती से बचना पड़ सकता है, जबकि लोन की दरों में राहत की राह थोड़ी मुश्किल हो सकती है.
Ind-Ra (इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च) के मुताबिक, जून 2026 में बैंकिंग सिस्टम का क्रेडिट ग्रोथ साल के आधार पर 18.3% रहा. इसमें सर्विस सेक्टर और इंडस्ट्री से लोन की मांग का बड़ा योगदान रहा. सर्विस सेक्टर का क्रेडिट 21.4% और इंडस्ट्रियल क्रेडिट 19.2% ज्यादा हुआ. वहीं, रिटेल लोन की ग्रोथ भी 15.8% रही.
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जमा और लोन में ज्यादा होता अंतर
31 जुलाई 2026 तक बैंकों की जमा में साल का 15.4% का इजाफा हुआ, जबकि एडवांस यानी दिए गए लोन 19.1% की रफ्तार से ज्यादा हुई यानी बैंक जितनी तेजी से लोन दे रहे हैं, उस हिसाब से उनके पास जमा पैसा नहीं बढ़ रहा है. इसी वजह से बैंकिंग सिस्टम का लोन डिपॉजिट रेशियो 80.3% पर पहुंच गया.
बैंकों को आगे भी लोन की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए काफी पैसा चाहिए. ऐसे में उन्हें कस्टमर्स से जमा जुटाने और मौजूदा डिपॉजिट बनाए रखने पर ध्यान देना होगा. Ind-Ra का मानना है कि इसी वजह से FD समेत डिपॉजिट की ब्याज दरों में बड़ी कटौती की गुंजाइश कम हो सकती है.
Ind-Ra ने FY27 के लिए डिपॉजिट ग्रोथ का अनुमान भी 11.4% से ज्यादा कर के 13.6% कर दिया है. FCNR डिपॉजिट से सिस्टम में करीब 2.5% से 3% एक्स्ट्रा जमा आने की उम्मीद है, लेकिन इसे फंडिंग दबाव का स्थायी हल नहीं माना गया है. ![]()
लोन लेने वालों पर क्या असर
Ind-Ra ने FY27 में क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान 13% से ज्यादा होकर 15% किया है. बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी 3.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है, जिससे हालात बेहतर हुए हैं. फिर भी लोन की मजबूत मांग के वजह से बैंकों को लगातार फंड की जरूरत रहेगी.
ऐसे में लोन की ब्याज दरों में आगे कितनी कमी होगी, यह बैंकों की फंडिंग खर्च, लिक्विडिटी और लोन की मांग पर निर्भर करेगा. यानी FD पर बड़ी कटौती की संभावना कम है, लेकिन लोन की EMI में राहत भी अभी पूरी तरह फिक्स नहीं है.
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