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LPG Scam : LPG घोटाले का बड़ा खुलासा’ 6 टैंकरों से 90 टन गैस पार, 1.5 करोड़ के गबन में मैनेजर गिरफ्तार

LPG Scam : LPG घोटाले का बड़ा खुलासा’ 6 टैंकरों से 90 टन गैस पार, 1.5 करोड़ के गबन में मैनेजर गिरफ्तार
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LPG Scam : LPG घोटाले का बड़ा खुलासा’ 6 टैंकरों से 90 टन गैस पार, 1.5 करोड़ के गबन में मैनेजर गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 LPG Scam : महासमुंद/रायपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एलपीजी गैस की एक बड़ी हेराफेरी का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने ‘ठाकुर पेट्रोकेमिकल’ प्लांट द्वारा करीब 90 मीट्रिक टन गैस चोरी करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस चोरी की गई गैस की बाजार में कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। शनिवार शाम एसपी प्रभात कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे घोटाले की कड़ियों का खुलासा किया।

क्या है पूरा मामला?

दिसंबर 2025 में अवैध रिफिलिंग की सूचना पर सरायपाली एसडीएम ने गैस से भरे 6 कैप्सूल (टैंकर) जब्त कर सिंघोड़ा थाने को सौंपे थे। सुरक्षा और ज्वलनशीलता के जोखिम को देखते हुए इन टैंकरों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल के परिसर में ‘सुपुर्दनामे’ (सुरक्षित रख-रखाव) पर रखा गया था। लेकिन प्लांट के जिम्मेदारों ने रक्षक बनने के बजाय भक्षक की भूमिका निभाई।LPG Scam : LPG घोटाले का बड़ा खुलासा’ 6 टैंकरों से 90 टन गैस पार, 1.5 करोड़ के गबन में मैनेजर गिरफ्तार

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कूटरचना कर खाली कर दिए टैंकर

एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक, डायरेक्टर और प्लांट मैनेजर ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची। 31 मार्च से 6 अप्रैल 2026 के बीच चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। अधिकारियों ने कूटरचना (दस्तावेजों में हेराफेरी) कर एक-एक कर सभी 6 टैंकरों से औसतन 17 मीट्रिक टन गैस अवैध रूप से निकाल ली। जब टैंकर के असली मालिक हाई कोर्ट के आदेश के बाद टैंकर लेने पहुंचे, तब पता चला कि सील टूटी हुई है और टैंकर पूरी तरह खाली हैं।

प्लांट मैनेजर गिरफ्तार, मालिक और डायरेक्टर फरार

पुलिस ने इस मामले में प्लांट मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे पूछताछ जारी है। वहीं, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालक संतोष ठाकुर और उनके पुत्र सार्थक ठाकुर फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनकी तलाश में टीमें भेजी गई हैं।

 

अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में

हैरानी की बात यह है कि जब टैंकर मालिक अपनी संपत्ति की जानकारी लेने सिंघोड़ा थाने पहुंचे, तो पुलिस और खाद्य विभाग के अफसरों ने उन्हें गुमराह किया। 5 दिनों तक मालिक को यह तक नहीं बताया गया कि उनके टैंकर कहाँ खड़े हैं। बाद में GPS ट्रैकर की मदद से पता चला कि टैंकर अभनपुर स्थित निजी प्लांट में खड़े हैं।




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