आदिवासी वैद्यों को मिलेगी मान्यता,सरकारी स्वास्थ्य तंत्र का बनेंगे हिस्सा
मध्यप्रदेश खबर डेस्क खबर 24×7 सतना // जंगलों और पहाड़ों की बस्तियों में पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपराओं में छिपा से आदिवासी चिकित्सा ज्ञान पहचान की चौखट तक पहुंचने वाला है। जड़ी-” बूटियों व पारंपरिक उपचार पद्धतियों – लोगों का दर्द बांटने वाले जनजातीय वैद्यों (ट्राइबल हीलर्स) को सरकार औपचारिक मान्यता देने की तैयारी में जुट गई है। जनजातीय कार्य विभाग जिलों में ऐसे वैद्यों की पहचान व नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला प्रशासन से इनके संबंध में जानकारी मांगी है। ने
यह पहल जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने शुरु की है। 6 मंत्रालय का मानना है कि जंगलों में रहने वाले लाखों परिवार प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय वैद्यों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में उनके ज्ञान का संरक्षण, दस्तावेजीकरण व संस्थागत उपयोग आवश्यक है।
इनको प्राथमिकता
जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था के आयुक्त डॉ. सत्येन्द्र सिंह की ओर से जारी निर्देशों में कहा कि इस दौरान समुदाय में सम्मानित व उपचार का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले वैद्यों का चयन किया जाएगा। हड्डी जोड़ने (बोन सेटिंग), सर्पदंश उपचार, जड़ी-बूटी चिकित्सा तथा पारंपरिक प्रसूति सेवाओं में दक्ष वैद्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर
इन वैद्यों में से 5000 मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे, जो आगे अन्य पारंपरिक चिकित्सकों को प्रशिक्षित करेंगे।![]()



![whatsapp-seeklogo[1]](https://khabar24x7.in/wp-content/uploads/2026/06/whatsapp-seeklogo1-300x89.png)

