मिट्टी की महक को मूर्ति में दिखाने में लीन हुई लीना
WOMEN’S DAY SPECIAL STORY: अक्सर प्रतिभा गावों में बसती है। आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रही है। अपने बलबूते अपनी पहचान बना रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश के लांजी जिले सादरा गांव की लीना रणदिवे मूर्तिकला के क्षेत्र में ऐसे लीन हुई की अपना कला को प्राचीन मूर्तियों में और प्राकृतिक पेड़ों – पौधो में देखती है।लीना के पिता आयुर्वेद डॉक्टर है।

पेंटिंग में थी रूचि पर मूर्ति बनते देख हुआ ये एहसास..
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर खबर 24×7 से बातचीत के दौरान लीना ने बताया कि 12 वी के बाद ग्रेजुएशन करने खैरागढ़ आयी मेरी रुचि पहले पेंटिंग में थी लेकिन एक दिन मैंने मूर्तिकार को मूर्ति बनाते देखा तब एहसास हुआ कि मैं भी मूर्ति बना सकती हूं ,इसलिए मूर्तिकला कला में मेरी रुचि बड़ी है।
पत्थर से लेकर धातु पर भी ला देती है जान
लीना बताती है कि वर्तमान में इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में एमएफए अंतिम वर्ष की स्टूडेंट है। और वह लकड़ी की नक्काशी, पत्थर की नक्काशी, धातु की ढलाई, मिट्टी की मॉडलिंग, टेराकोटा, सिरेमिक, फाइबर कास्टिंग, पेंटिंग, सीमेंट, रिलीफ कार्य अन्य मीडियम में काम करती है।

इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में 2020- 2021 में और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन अहमदाबाद में 2023 में कैम्प में शामिल रही है।
वहीं सवाल आप अपनी कला के माध्यम से क्या संदेश देना चाहते हैं के जवाब में कहना है कि “मैं अपनी कला के माध्यम से अपने क्षेत्र राज्य देश और विदेश में अपने अंदर छुपी हुई कला को जन – जन तक पहुंचाना चाहती हूं अपने कला से लोगों को प्रेरित करना चाहती हूं।”



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