जंगल में रहस्यमयी मौतें: पक्षियों और जानवरों के शव मिलने से हड़कंप
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ // जिले के दल्लीखोली और लछना जंगल से सामने आई एक रहस्यमयी घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जंगल के भीतर एक जलस्रोत के पास बड़ी संख्या में पक्षियों और जंगली जानवरों के शव मिलने से वन विभाग और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
मामला तब सामने आया जब वन्यजीव और नेचर फोटोग्राफर मुकेश वर्मा बर्ड वॉचिंग और नेचर फोटोग्राफी के लिए दल्लीखोली के जंगल पहुंचे थे। जंगल के भीतर घूमने के दौरान उनकी नजर सबसे पहले एक मृत ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो पक्षी पर पड़ी। लेकिन जब उन्होंने आसपास तलाश शुरू की, तो नज़ारा और भी चौंकाने वाला था। जलस्रोत के पास कई दुर्लभ पक्षियों और जंगली जानवरों के शव पड़े मिले, जिनमें एक नर मोर, दो मादा मोर, तीन एशियन पाम सिवेट के अलावा रुफस ट्रीपाई, ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन और जंगल आउलेट जैसे पक्षी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सोशल मिडिया पर पोस्ट किया विडियो.. फिर मचा हड़कंप
मुकेश वर्मा ने पूरे घटनास्थल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसके वायरल होते ही इलाके में हड़कंप मच गया और लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताने लगे। शुरुआत में सबसे बड़ा शक जंगल के जलस्रोत में ज़हर मिलाने को लेकर जताया जा रहा था। आशंका थी कि किसी जहरीले रसायन या पदार्थ के कारण पानी दूषित हुआ और उसे पीने के बाद इन जानवरों और पक्षियों की मौत हो गई।
विभाग मौके पर पहुंच लिया सेम्पल और सबूत
हालांकि घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी और जलस्रोत से पानी के सैंपल और अन्य जरूरी सबूत इकट्ठा किए। इसके साथ ही बिलासपुर के कानन पेंडारी जू से आए विशेषज्ञों और जिले के स्थानीय पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कराया गया ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके।
संभावित रूप से ‘हीट स्ट्रोक’ है कारण : डीएफओ पंकज राजपूत
इस पूरी घटना पर स्थिति स्पष्ट करते हुए डीएफओ पंकज राजपूत ने बताया कि खैरागढ़ रेंज के लछना सर्किल में दल्लीखोली एक बीट और पहाड़ी इलाका है, जहां अच्छा जंगल है। वहां कुछ पक्षियों और जानवरों के मरने की सूचना मिलने के बाद विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि हालांकि अंतिम ऑटोप्सी रिपोर्ट आना अभी बाकी है, लेकिन एक्सपर्ट डॉक्टरों द्वारा प्राथमिक तौर पर ऐसा बताया जा रहा है कि इन वन्यजीवों की मौत संभावित रूप से ‘हीट स्ट्रोक’ (लू लगने) से हुई है।
डीएफओ राजपूत ने बताया कि जब मृत जीवों के अंदरूनी अंगों को देखा गया, तो वे अत्यधिक तापमान के कारण सेमी-कुक्ड जैसे दिखाई दे रहे थे, जिससे लगभग तय है कि वे भीषण गर्मी का शिकार हुए हैं। हालांकि वहां पानी की उपलब्धता थी और ये जीव पानी के आस-पास तक पहुंचे भी थे, लेकिन पिछले चार-पांच दिनों में अचानक बढ़ी अत्यधिक गर्मी के कारण उन्हें गंभीर डिहाइड्रेशन हुआ और वे हीट स्ट्रोक को संभाल नहीं पाए।
पानी में जहर होने की संभावना नहीं
डीएफओ पंकज राजपूत ने मामले में शिकार या जहरखुरानी जैसी आशंकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी में जहर होने की संभावना इसलिए नहीं है क्योंकि उसी जलस्रोत के अंदर मेंढक और अन्य जीव पूरी तरह सुरक्षित और जीवित हैं। इसके अलावा शिकार की बात भी तार्किक नहीं लगती, क्योंकि अगर यह शिकार का मामला होता तो शिकारी शवों या उनके अंगों को वहां नहीं छोड़ते। साथ ही केमिकल या पॉइज़न का उपयोग करके इस तरह शिकार करने से कोई खास लाभ भी नहीं मिलना है।![]()
| मृत जीवों में तीन मोर, एक ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो, दो ब्लैक ड्रोंगो (कोतवाल) और ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन जैसे पक्षी शामिल हैं। उधर, इस घटना के बाद ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। |
लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय पक्षी मोर और दुर्लभ एशियन पाम सिवेट की एक साथ इस तरह मौत होना बेहद गंभीर मामला है। ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पूरे इलाके की नजर वन विभाग की अंतिम पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके बाद ही मौत के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
Mysterious deaths in the forest: Discovery of dead bodies of birds and animals creates panic


