गर्मी में ठंडक देने वाला छत्तीसगढ़ी स्वाद
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खानपान के लिए जाना जाता है। गर्मी के मौसम में यहाँ के लोग ऐसे व्यंजन पसंद करते हैं जो शरीर को ठंडक दें, पाचन में हल्के हों और पोषण से भरपूर हों। खबर 24×7 कुछ प्रमुख छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की विशेषताओं, उनकी विधि, उनके स्वास्थ्यगत लाभ प्रस्तुत कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी होते हैं। ये व्यंजन शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करते हैं, पाचन में सहायता करते हैं और गर्मी के मौसम में ताजगी बनाए रखते हैं। इन व्यंजनों का सेवन कर हम अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हुए सेहतमंद जीवनशैली अपना सकते हैं।
बोरे बासी केवल एक व्यंजन नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति, किसानों और मजदूरों की जीवनशैली का एक अहम हिस्सा है। तपती गर्मियों में यह शरीर को ठंडक और तुरंत ऊर्जा देने वाले एक “देशी सुपरफूड” के रूप में काम करता है। खासियतः यह पका हुआ चावल होता है, जिसे रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है और सुबह इसका सेवन किया जाता है। यह पाचन के लिए बहुत हल्का और गर्मी में ठंडक देने वाला व्यंजन है। विधिः रात में बचे पके चावल को पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इसे नींबू, नमक, कच्चे प्याज, हरी मिर्च और सरसों के तेल के साथ खाया जाता है। ![]() स्वास्थ्यगत लाभ 🔶 पाचन को दुरुस्त रखता है। 🔶 पेट को ठंडक पहुँचाता है। 🔶 प्री-बायोटिक्स से भरपूर, आँतों के लिए लाभकारी है। आवश्यक सामग्रीः पका हुआ चावल, पानी, नमक, सरसों तेल, हरी मिर्च, प्याज, नींबू । प्रमुख क्षेत्रः बस्तर, जशपुर व छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक खाया जाता है। |
तीखुर शरबत छत्तीसगढ़ (विशेषकर बस्तर क्षेत्र) का एक पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय स्वास्थ्य पेय है। यह तीखुर नाम के पौधे के कंद से तैयार किए गए सफेद पाउडर (Starch) से बनता है खासियतः तीखुर एक प्रकार का स्टार्च होता है जो गर्मी में ठंडक देने के लिए जाना जाता है। यह शरीर में गर्मी को कम करता है और हाइड्रेशन बनाए रखता है। विधिः तीखुर पाउडर को पानी में अच्छे से घोल लें। इसमें गुड़ या शक्कर मिलाकर ठंडा परोसें। ![]() स्वास्थ्यगत लाभ 🔶 शरीर की गर्मी को कम करता है। आवश्यक सामग्रीः तीखुर पाउडर, पानी, गुड़ या शक्कर। प्रमुख क्षेत्रः बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में यह विशेष रूप से प्रचलित है। |
बेल का शरबत गर्मियों के मौसम में शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने और लू से बचाने के लिए एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक पेय है। यह न केवल पीने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कब्ज और अपच के लिए रामबाण माना जाता है। खासियतः बेल फल से बनाया जाने वाला यह शरबत गर्मी के मौसम में अत्यंत लाभकारी होता है। यह पेट की समस्याओं से राहत देता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। विधिः बेल फल को तोड़कर उसका गूदा निकाल लें। इसे पानी में घोलकर छान लें। इसमें गुड़ या शक्कर मिलाकर ठंडा परोसें।
स्वास्थ्यगत लाभ : 🔶 पेट की गर्मी को कम करता है। 🔶 पाचन में सहायक होता है। 🔶 डिहाइड्रेशन से बचाव करता है। आवश्यक सामग्रीः पका हुआ बेल फल, पानी, गुड़ या शक्कर। प्रमुख क्षेत्रः यह बिलासपुर, रायगढ़ और ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय है। |
कुसुम्बी शरबत पारंपरिक रूप से कुसुम (Safflower) के फूलों से बनने वाला एक हर्बल और ताज़गी देने वाला पेय है, जो अपनी ठंडी तासीर के लिए जाना जाता है। खासियतः यह कुसुम के बीजों से बनाया जाने वाला पेय है जो गर्मी में शरीर को ठंडक प्रदान करता है। यह छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हर्बल ड्रिंक्स में से एक है। विधिः कुसुम के बीजों को रातभर पानी में भिगो दें। सुबह इसे छानकर शक्कर या गुड़ के साथ घोलकर पिएँ।
स्वास्थ्यगत लाभ 🔶 शरीर को ठंडा रखता है। 🔶 हाइड्रेशन बनाए रखता है। 🔶 रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। आवश्यक सामग्रीः कुसुम के बीज, पानी, गुड़ या शक्कर। प्रमुख क्षेत्रः यह सरगुजा और जशपुर जिले में अधिक खाया जाता है। |
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खासियतः यह गेहूँ की रोटी को पानी या मढे में भिगोकर बनाया जाता है। इसे गर्मी के मौसम में ठंडक के लिए खाया जाता है। विधिः बची हुई रोटी को छोटे टुकड़ों में तोड़ लें। इसे मट्ठे या पानी में भिगो दें। स्वाद के लिए नमक, हरी मिर्च और प्याज डालें।
स्वास्थ्यगत लाभः 🔶 शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। 🔶 पाचन को सही रखता है। 🔶 पेट की गर्मी को कम करता है। आवश्यक सामग्रीः गेहूँ की रोटी, मठ्ठा या पानी, नमक, हरी मिर्च, प्याज प्रमुख क्षेत्रः यह दुर्ग, राजनांदगाँव और रायपुर में अधिक खाया जाता है।। |







