संगीत विश्वविद्यालय के लोक संगीत एवं कला संकाय में प्रदर्शनात्मक व्याख्यान
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ // इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के लोक संगीत एवं कला संकाय में मध्यप्रदेश के कोरकू लोकगीत के प्रसिद्ध लोक कलाकार स्व. राधेश्याम शांडिल्य एवं मालवा मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध लोक कलाकार स्व. हीरा सिंह बोरेलिया की स्मृति में “स्मरण राधेश्याम एवं हीरासिंह” कार्यक्रम का आयोजन 6 जनवरी 2026 को किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रो.डॉ. लवली शर्मा उपस्थित रहीं। अध्यक्षता प्रो. डॉ. राजन यादव अधिष्ठाता लोक संगीत एवं कला संकाय ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी व लोक संगीत एवं कला संकाय के पूर्व अधिष्ठाता प्रो. भरत पटेल उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम लोक संगीत विभाग के शोध अभ्यर्थी परमानंद जंघेल ने स्व.राधेश्याम शांडिल्य एवं सर्वजीत बाम्बेश्वर ने स्व. हीरा सिंह बोरलिया की जीवनी पर सारगर्भित प्रकाश डाला साथ ही लोक गीतों एवं लोक कलाओं के संरक्षण में उनके योगदान से अवगत कराया गया। इस दौरान लोक गायक डॉ. कृष्ण कुमार पाटिल द्वारा “लोक गीतों का बदलता स्वरूप” विषय पर प्रदर्शनात्मक व्याख्यान भी दिया गया।
लोक हमें अंतरात्मा से जोड़ता है इसे संरक्षित करना आवश्यक – कुलपति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि लोक हमें अंतरात्मा से जोड़ता है, इसे संरक्षित करना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को अपने में समाहित कर इसके संरक्षण के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

प्रो. राजन यादव ने विद्यार्थियों को संस्कृति का विस्तार कैसे हुआ इससे अवगत कराया साथ ही ग्रामीण परिवेश में रहने वाले विद्यार्थियों से गांव की संस्कृति को संरक्षित करने के लिए प्रेरित किया।
कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने कहा कि कुलपति की सक्रियता के कारण विश्वविद्यालय में ऐसे कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। ऐसे आयोजन से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास हो रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को परंपरा एवं संस्कृति की जानकारी दी।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. दीपशिखा पटेल ने संचालन किया। प्रो. राजन यादव ने कार्यक्रम में उपस्थिति हेतु सभी का आभार जताया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकगण, शोधार्थीगण एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।
Demonstration lecture at the Faculty of Folk Music and Arts, Music University


