14 से 18 साल के 2 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर, फिर से जोड़ने होगी पहल
नेशनल खबर डेस्क खबर 24×7 नई दिल्ली // पहले कोरोना महामारी और उसके बाद अलग-अलग कारणों से स्कूलों से दूर होते बच्चों को फिर से वापस लाने के बेहद संवेदनशील मामले को लेकर शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमाम भागीदारों का जोर बच्चों को फिर से औपचारिक स्कूली शिक्षा से जोड़ने पर केंद्रित होना चाहिए।
चिंतित शिक्षा मंत्रालय एनआईओएस के साथ मिलकर चलाएगा कार्यक्रम
वहीं, जो बच्चे नियमित स्कूलों में नहीं लौट पा रहे हैं। उन्हें ओपन, डिस्टेंस लर्निंग व्यवस्थाओं के माध्यम से एनआईओएस और राज्य मुक्त विद्यालयों जैसे लचीले शिक्षण माध्यमों से जोड़ा जाना चाहिए। जमीनी स्तर पर इस पहल को लागू करने और इसे एक राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में तब्दील करने में जिलाधीशों, जिला प्रशासन की अहम भूमिका होगी। उन्होंने राज्यों सहित अन्य भागीदारों से इस मामले में सहयोग के साथ-साथ तीव्र गति से कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

दिल्ली, मप्र., छत्तीसगढ़ में समस्या गंभीर
इस पहल के शुरुआती कार्यक्रम के लिए ऐसे पायलट जिलों की पहचान की गई है। जहां स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम है। जिसमें ओडिशा, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं। पहले चरण में पहल को देश के 10 जिलों में लागू किया जाएगा और फिर मिले अनुभव के आधार पर इसे देशभर में क्रियान्वित किया जाएगा। एन आईओएस के अध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश मिश्रा ने कहा, शिक्षा आशा, गरिमा और अवसर का प्रतीक है। लेकिन मुख्य चुनौती तो उन बच्चों तक पहुंचने की है, जो शिक्षा प्रणाली से कटे हुए हैं। पीएलएफएस के ताजा अनुमान बताते हैं कि वर्तमान में 14 से लेकर 18 वर्ष तक की आयु वर्ग के कुल करीब 2 करोड़ बच्चे स्कूलों से बाहर यानी आउट ऑफ स्कूल हैं। वहीं, कक्षा 1 में दाखिला लेने वाले 100 में से केवल 62 बच्चे ही 12वीं कक्षा तक पहुंच पाते हैं। ![]()
20 Million Children Aged 14 to 18 Are Out of School; Initiatives Must Be Taken to Reintegrate Them.


