सरकारी स्कूलों की चिंताजनक तस्वीर: स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं, स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक..पढ़ें पूरी खबर
राष्ट्रीय खबर डेस्क खबर 24×7 नई दिल्ली // नीति आयोग की रिपोर्ट में देश के सरकारी स्कूलों की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। इसके मुताबिक देश में हजारों स्कूल बिना पानी, बिजली, शौचालय, लैब और शिक्षकों के चल रहे हैं और कुछ स्कूलों में तो छात्र तक नहीं है।
ऐसी है स्कूलों के व्यवस्था…
साल 2005 में जहां 71% छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे, वहीं वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा गिरकर मात्र 49.24% रह गया है।

इसके विपरीत, अब माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर 44.01% संस्थान प्राइवेट स्कूलों के रूप में संचालित हो रहे है। रिपोर्ट में शौचालयों की समग्र उपलब्धता का प्रतिशत तो ठीक है, लेकिन 98592 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय चालू हालात में नहीं हैं, जबकि 61540 स्कूलों में उपयोग योग्य शौचालय नहीं है।![]()
14505 स्कूलों में पानी की सुविधा नहीं है। 59829 स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा भी नहीं है। सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में से केवल 51.7 प्रतिशत में ही विज्ञान प्रयोगशालाएं है।
यहाँ ड्राप आउट सबसे ज्यादा |
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पश्चिम बंगाल 20 % |
अरुणाचल
18.3 % |
कर्नाटक
18.3 % |
असम 17.5 % |
7993 स्कूलों में शून्य नामांकन
रिपोर्ट के अनुसार, देश में 104125 स्कूल एक ही शिक्षक के साथ चल रहे हैं। इनमें 89% स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। नामांकन की बात करें तो, देश में लगभग 7993 ऐसे स्कूल हैं, जिनमें शून्य नामांकन है। पश्चिम बंगाल में ऐसे स्कूलों की संख्या सबसे अधिक (3812) है, उसके बाद तेलंगाना (2245) का स्थान है।
यहां प्राथमिक शिक्षकों के सबसे ज्यादा पद खाली
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रिपोर्ट पर एक नजर
♦ शिक्षकों की योग्यताः 2% शिक्षक ही गणित में 70% अंक पा सकते हैं, जबकि औसत अंक 46% है।
♦ गैर शैक्षणिक कार्यः औसतन 14% शिक्षण दिवस सर्वेक्षण, चुनाव और प्रशासनिक कार्यों जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में खर्च हो जाते हैं।
♦ पानी-बिजलीः एक दशक में स्कूलों में बिजली की उपलब्धता 55% से बढ़कर 91.9% हुई, लेकिन अब भी 1.19 लाख स्कूलों में बिजली नहीं है।
♦ स्कूलों पर खर्चः भारत जीडीपी का 4.6% शिक्षा पर खर्च करता है।
No toilets for girls in schools, only one teacher in schools: source.patrika


