खाड़ी संकट: ग्लोबल सप्लाई चेन चरमराई, मल्टी-सेक्टर कमोडिटी संकट गहराया
व्यापार खबर डेस्क खबर 24×7 नई दिल्ली // ईरान युद्ध के कारण होपुंज स्टेट में आवागमन बाधित होने से ग्लोबल सप्लाई चेन गहरे संकट में है। इस युद्ध का असर अब सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा, जो प्रति चैरल 103 डॉलर के पार हो चुका है। बल्कि इसका असर ईंधन, उर्वरक धातु, पेट्रोकेमिकल और यहां तक कि दवा उद्योग तक फैल चुका है। खाड़ी क्षेत्र, जो दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा और कच्चे माल की आपूर्ति करता है, वहां से निर्यात लगभग उप हो गया है। इसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग और खाद्य उत्पादन, ये तीनों प्रमुख सेक्टर दनाव में आ चुके हैं। पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की कीमतें तेजी से बढ़ रही है, जबकि उर्वरकों और जरूरी रसायनों की कमी से कृषि उत्पादन पर खतरा पंडरा रहा है। एशिया, यूरोप और अप जैसे बड़े क्षेत्र इस संकट को चपेट में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर 2026 की फसल में लेकर 2027 तक औद्योगिक उत्पादन पर दिखाई देगा।

रिफाइनिंग 5-15% घटीः एशियाई रिफाइनरियों को वैकल्पिक
तेल महंगा मिल रहा है जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। डीजल औरह जेट फ्यूल की कमी हो रही है। चीन, भारत, जापान और थाईलैंड जैसे देशों में रिफाइनिंग 5-15% सक घट गई है। इससे चीन ने रिफाइंड उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है. जिससे सिंगापुर जैसे एशियाई ट्रेडिंग हथ में कीमतें उछल गई हैं। यूरोप भी दबाव में है, क्योंकि यह जेट फ्यूल का बड़ा हिस्सा खाड़ी और एशिया से आयात करता है।
| मैंन्युफैकचर इंडस्ट्री संकट में..
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर संकट में है. खाड़ी के पेट्रोकेमिकल सप्लाई पर निर्भर है। नैफ्था स्टाइरीन और पॉलीइथिलीन जैसे प्रमुख कच्चे माल का निर्यात बाधित हो गया है। दवा उद्योग पर भी असर साफ दिख रहा है, क्योंकि दवाओं के एक्टिव कंपाउंड पेट्रोकेमिकल्स से बनते हैं। भारत और चीन जैसे बड़े फार्मा हब इस सप्लाई पर निर्भर हैं। इसके अलावा, औद्योगिक हीरे, ग्लाइकोल और मेथेनॉल जैसी चीजों की कमी से कैमिकल सेक्टर पर दबाव है। |
मेटल में उथल-पुथल..
एल्युमिनियम की कीमतों में बड़ा उशल आया है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसकी कीमत चार साल के उच्च स्तर 3.440 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। खाड़ी के स्मेल्टर गैस और कच्चे माल की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि निर्मात भी बाधित है। यूरोप और अमरीका जो खाड़ी सप्लाई पर निर्भर है. सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। वहीं, ईरान से आने वाले सेमी-फिनिश्ड स्टील की सप्लाई घटने से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
हीलियम संकट से टेक इंडस्ट्री पर खतरा..इस संकट का असर हीलियम पर भी पड़ा है। यह गैस सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में बेहद जरूरी होती है। कतर, जो वैश्विक हीलियम सप्लाई का लगभग एक-तिहाई उत्पादन करता था, उसका प्रमुख रास लाफान प्लांट बंद हो गया। |
वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर असर
वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर असर खाद्य उत्पादन पर इसका सबसे गंभीर 35% असर पड़ रहा है। होमेज स्ट्रेट से दुनिया के एक-तिहाई समुद्री उर्वरक व्यापार गुजरता है। युद्ध के बाद से यूरिया के दाम 35% और सल्फर के दाम 40% तक बढ़ चुके हैं। किसानों के सामने विकल्प सीमित हैं या तो महंगी खाद खरीदें या कम इस्तेमाल करें।
Gulf crisis: Global supply chains collapse, multi-sector commodity crisis deepens


