मधुमेह क्लिनिक में समय पर नहीं पहुंच रही डॉक्टर, भीषण गर्मी में परेशान हो रहे मासूम
छत्तीसगढ़ खबर डेस्क खबर 24×7 खैरागढ़ // बाल मधुमेह क्लिनिक को स्वास्थ्य मंत्री की पहल और सरकारी योजना के तहत शुरू किया गया था। उम्मीद थी कि इससे जिले के बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन महज दो माह के भीतर ही क्लिनिक की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

क्लिनिक का निर्धारित समय सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक तय किया गया है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि क्लिनिक में पदस्थ डॉ. नीतू बनपुरिये अक्सर तय समय से काफी देर बाद पहुंचती हैं, जिससे मासूम मरीजों और उनके परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि सल्हेवारा, बकरकट्टा और वनांचल क्षेत्र से कई परिवार अपने बच्चों को लेकर सुबह-सुबह अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन डॉक्टर के समय पर नहीं आने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। भीषण गर्मी और तपती धूप में छोटे-छोटे बच्चे अस्पताल परिसर में परेशान होते दिखाई देते हैं। परिजनों का कहना है कि मधुमेह समय पर परामर्श और दवा बेहद जरूरी होती है, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
दो माह में ही व्यवस्था पर उठे सवाल
बच्चों को बेहतर इलाज और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी से राहत दिलाने के उद्देश्य से 18 मार्च 26 को सिविल हॉस्पिटल में बाल मधुमेह क्लिनिक शुरू किया गया ।
जिसको लेकर परिजनों का कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहेंगी तो इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। बाल मधुमेह बच्चों में होने वाली डायबिटीज की बीमारी है। इसमें शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता है क्योंकि शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता।
बच्चों में सबसे ज्यादा टाइप-1 डायबिटीज पाई जाती है, जिसमें बच्च्चे को जीवनभर इंसुलिन और नियमित जांच की जरूरत पड़ सकती है। समय पर इलाज और सतत निगरानी नहीं मिलने पर यह बीमारी बच्चों के भविष्य पर गंभीर असर डाल सकती है। जब बच्चों के बेहतर भविष्य और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग पर है तो आखिर मासूम मरीजों को घंटों इंतजार किस कारण करना पड़ रहा है।![]()
मनमानी से व्यवस्था प्रभावित
सूत्रों के अनुसार, आज भी डॉक्टर करीब 11 बजे के बाद क्लिनिक पहुंची, जबकि निर्धारित समय 9 बजे का है। करने के उद्देश्य से खैरागढ़ में यह क्लिनिक शुरू इससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
लोगों का कहना है कि सरकार और जिला स्वास्थ्य विभाग ने राजनांदगांव की लगभग 100 किलोमीटर की दूरी कम किया था, ताकि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के बच्चों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिल सके। लेकिन जिन डॉक्टरों को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हीं की कथित मनमानी से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि जानकारी के बाद उच्च अधिकारी नोटिस जारी करने की बात कह रहे है।


